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भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव: बांग्लादेश ने नागरिक को स्वीकार किया

मेघालय के महेंद्रगंज में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 20 घंटे तक चले तनाव के बाद बांग्लादेश ने अपने नागरिक को स्वीकार किया। यह घटना उस समय हुई जब भारतीय अधिकारियों ने एक व्यक्ति को अवैध रूप से सीमा पार करते हुए पकड़ा। बांग्लादेश के अधिकारियों ने शुरू में उसे पहचानने से इनकार कर दिया, जिससे सीमा पर तनाव बढ़ गया। जानें इस व्यक्ति की पहचान और इस घटना के पीछे की कहानी, जो असम में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सामने आई।
 

सीमा पर तनाव का समाधान

मेघालय के महेंद्रगंज में नंदिरचर के निकट भारत-बांग्लादेश सीमा पर लगभग 20 घंटे तक चले तनाव के बाद स्थिति अब सामान्य हो गई है। बांग्लादेश ने अंततः अपने नागरिक को स्वीकार करने पर सहमति जताई। सूत्रों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने उस व्यक्ति को बांग्लादेश को सौंपने का प्रयास किया था, जब वह कथित तौर पर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हुए पकड़ा गया था। हालांकि, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवानों और बांग्लादेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों ने शुरू में उसे अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया। इस गतिरोध के दौरान, 55 वर्षीय व्यक्ति कई घंटों तक 'नो-मैनज़-लैंड' में फंसा रहा। 


55 वर्षीय व्यक्ति की पहचान

55 साल का व्यक्ति कौन?

जिस बांग्लादेशी नागरिक को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने वापस भेजा, उसकी पहचान बांग्लादेश के राजशाही ज़िले के गोदागारी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत चंदलाई गाँव के निवासी के रूप में हुई है। इस घटना ने बांग्लादेश की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि देश ने अपने नागरिक को पहचानने और स्वीकार करने से इनकार किया। इस कारण अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव बना रहा। हिंदू समुदाय से संबंधित इस व्यक्ति के साथ किए गए व्यवहार की भी आलोचना की गई है। कई लोगों ने इसे अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना बताया, क्योंकि उसे अपने देश लौटने की अनुमति मिलने से पहले लगभग 20 घंटे तक सीमा पर इंतजार करना पड़ा। यह घटनाक्रम असम में बिना वैध दस्तावेजों वाले बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सामने आया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि राज्य 2026 में अवैध घुसपैठ के खिलाफ और भी सख्त कदम उठाएगा, जबकि अधिकारी देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और उन्हें वापस भेजने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।