भारत में एलपीजी संकट: पांच सप्ताह में चार लाख कनेक्शन पीएनजी में परिवर्तित
पश्चिम एशिया संकट के बीच एलपीजी की कमी को नियंत्रित करने में सफलता
एलपीजी संकट का सामना करते हुए भारत की स्थिति
पेट्रोलियम मंत्रालय ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण एलपीजी की कमी को कम करने में सफलता प्राप्त की है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ा है। भारत की अधिकांश गैस आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है, जो युद्ध के कारण बंद हो गई।
इस स्थिति के कारण भारत में पेट्रोल, डीजल और विशेष रूप से एलपीजी की कमी महसूस की गई। केंद्र सरकार ने इस समस्या का समाधान करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय को विशेष रणनीति अपनाने का निर्देश दिया, जिसके परिणामस्वरूप भारत अब इस संकट से बाहर निकल चुका है।
स्थिति को संभालने के उपाय
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि पिछले पांच हफ्तों में चार लाख से अधिक एलपीजी कनेक्शनों को पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (पीएनजी) में परिवर्तित किया गया है। प्रतिदिन लगभग एक लाख 5-किलो के सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और वितरकों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
एलपीजी उत्पादन में वृद्धि की गई है, जो वर्तमान में हमारी आवश्यकता का लगभग 60% है। कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है।
देशभर में आपूर्ति की स्थिति
सुजाता शर्मा ने कहा कि हमारे एलपीजी वितरकों और पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक है और किसी भी प्रकार की कमी की सूचना नहीं मिली है। घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य है और ऑनलाइन बुकिंग लगभग 98 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
मार्च में जब पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित हुई थी, तब सरकार ने घरों और व्यवसायों को पीएनजी पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया। नेटवर्क वाले क्षेत्रों में पाइपलाइन गैस कनेक्शन अनिवार्य कर दिए गए हैं और तीन महीने बाद एलपीजी की आपूर्ति बंद करने की योजना बनाई गई है।