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भारत में टेलीग्राम पर पाबंदी से हड़कंप, CEO ने लगाया गंभीर आरोप

भारत सरकार ने टेलीग्राम पर पाबंदी लगाने का आदेश दिया है, जिससे CEO पावेल डुरोव ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 'बीजीपी हाइजैकिंग' तकनीक का जिक्र करते हुए कहा कि यह न केवल भारत में, बल्कि यूएई में भी यूजर्स को प्रभावित कर रही है। जानें इस तकनीकी संकट के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

सोशल मीडिया पर टेलीग्राम का संकट

नई दिल्ली, 19 जून, 2026। दिल्ली से लेकर दुबई तक टेलीग्राम ऐप को लेकर एक बड़ा हंगामा मच गया है। भारत सरकार ने 22 जून तक इस ऐप पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने का आदेश दिया है, जिसके बाद टेलीग्राम के मालिक और सीईओ पावेल डुरोव का गुस्सा बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारतीय सीमा में टेलीग्राम को ठप करने के लिए 'बीजीपी हाइजैकिंग' नामक एक जटिल डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।


यूएई और दुबई में कई यूजर्स अचानक इस डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक का शिकार हो गए हैं। पावेल डुरोव के अनुसार, इस तकनीकी घेराबंदी का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात के बड़े यूजर बेस को भी कनेक्टिविटी में बाधा का सामना करना पड़ रहा है।


साइबर जगत में 'बीजीपी हाइजैकिंग' अब सबसे चर्चित विषय बन गया है। बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (BGP) को इंटरनेट के ढांचे की रीढ़ माना जाता है, जो यह निर्धारित करता है कि डेटा पैकेट्स को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क तक कैसे भेजा जाए। इसे इंटरनेट का ट्रैफिक पुलिस भी कहा जा सकता है।


जब आप अपने मोबाइल पर किसी वेबसाइट को खोलते हैं या टेलीग्राम पर संदेश भेजते हैं, तो BGP तकनीक सुनिश्चित करती है कि आपका डेटा सही रास्ते से पहुंचे। यहां पढ़ें: AI आपकी नौकरी नहीं छीन सकता, बस ये 5 गुण विकसित करें, नई रिपोर्ट में खुलासा


समस्या तब उत्पन्न होती है जब कोई बड़ा नेटवर्क या सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर गलत रूटिंग जानकारी देकर इंटरनेट को यह विश्वास दिलाता है कि टेलीग्राम तक पहुंचने का सही रास्ता उसके सर्वर से होकर जाता है। इसे तकनीकी भाषा में BGP हाइजैकिंग कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप, इंटरनेट ट्रैफिक अचानक गलत दिशा में मुड़ जाता है।


इसे इस तरह समझें कि जैसे किसी नेशनल हाईवे पर कोई अपराधी एक फर्जी बोर्ड लगाकर सही रास्ते को छोड़कर दलदल या बंद गली की ओर ले जाता है। इस तरह, गाड़ियां अनजाने में गलत रास्ते पर मुड़ जाती हैं और अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पातीं।


वैश्विक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इस सुरक्षा चूक पर वर्षों से विचार कर रहे हैं, क्योंकि BGP का पूरा ढांचा आपसी भरोसे पर आधारित है। जब कोई बड़ा इंटरनेट नेटवर्क दावा करता है कि वह किसी विशेष डिजिटल गंतव्य तक डेटा पहुंचा सकता है, तो अन्य नेटवर्क बिना किसी जांच के उस पर भरोसा कर लेते हैं। इसी का फायदा उठाकर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया है।


सुरक्षा प्रणालियों में कई बदलावों और एन्क्रिप्शन के दावों के बावजूद, BGP हाइजैकिंग के जरिए बड़ी टेक कंपनियों के सर्वर को प्रभावित किया जा सकता है। भारत में 22 जून की समयसीमा के बीच टेलीग्राम का यह विवाद अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर-पॉलिटिकल टकराव का रूप ले चुका है।