भारत में डिजिटल लेनदेन पर नए शुल्क का विवाद
डिजिटल लेनदेन पर नया शुल्क
भारत में घटनाएं अक्सर अतिवादी रूप में होती हैं। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2016 में नोटबंदी की थी, तब भारतीय जनता पार्टी और सरकार ने नकद लेनदेन को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करने का एक संगठित अभियान चलाया। उस समय यह प्रचारित किया गया कि नकद लेनदेन करना गलत है और देशभक्त नागरिकों को डिजिटल लेनदेन अपनाना चाहिए। हालांकि, उस समय डिजिटल लेनदेन का ढांचा इतना मजबूत नहीं था, जिससे लोगों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, धीरे-धीरे लोगों ने डिजिटल लेनदेन को अपनाना शुरू किया।
अब, जब केंद्र सरकार ने यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर शुल्क लगाने का निर्णय लिया है, तो एक नया अभियान शुरू हो गया है। इस बार डिजिटल लेनदेन को नकारात्मक रूप में पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर मीम्स वायरल हो रहे हैं, जिनमें दिखाया जा रहा है कि गोलगप्पे वाले से नकद में खरीदने पर 20 रुपये में पांच गोलगप्पे मिलेंगे, जबकि यूपीआई से खरीदने पर केवल चार गोलगप्पे मिलेंगे। एक मीम में दुकानदार ग्राहक को समझा रहा है कि 19 सौ रुपये यूपीआई से और 600 रुपये नकद में दें। इसी बीच, व्यापारियों के एक बड़े समूह ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस शुल्क को समाप्त करे, अन्यथा वे डिजिटल लेनदेन का बहिष्कार कर नकद लेनदेन करने पर मजबूर होंगे। इस स्थिति के कारण सरकार विपक्ष से अधिक सोशल मीडिया और व्यापारियों के विरोध से चिंतित हो गई है।