भारत में नए श्रम कोड से नौकरीपेशा लोगों को मिलेगी राहत
नई दिल्ली: एक महत्वपूर्ण बदलाव
नई दिल्ली: भारत में कामकाजी लोगों के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया नया श्रम कोड, जिसे 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड 2020' (Labour Code 2025) के नाम से जाना जाता है, कर्मचारियों के अधिकारों को और मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। इस नए कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू छुट्टियों से संबंधित है, जो विशेष रूप से नए जॉइन करने वाले युवाओं के लिए कार्य-जीवन संतुलन को नया रूप देगा।
छुट्टियों की नई परिभाषा
पारंपरिक श्रम कानूनों के अनुसार, किसी भी संस्थान में 'अर्न्ड लीव' का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को कम से कम 240 दिन यानी लगभग 8 महीने काम करना आवश्यक था। लेकिन नए श्रम कोड में इस अवधि को घटाकर केवल 180 दिन (6 महीने) कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि अब कर्मचारी अपनी नियुक्ति के छह महीने बाद ही वैधानिक छुट्टियों का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उन्हें साल के बीच में परिवार और व्यक्तिगत कार्यों के लिए राहत मिलेगी।
छुट्टियों का नकद लाभ
छुट्टियों के बदले नकद: एनुअल लीव एनकेशमेंट
नए नियमों के तहत न केवल छुट्टियों का लाभ लेना आसान हुआ है, बल्कि छुट्टियों की बर्बादी को रोकने के लिए भी ठोस प्रावधान किए गए हैं। कानून के अनुसार, अब कर्मचारी अपनी सालभर की अतिरिक्त या बची हुई छुट्टियों को बेकार जाने के बजाय 'कैश' (Leave Encashment) के रूप में भुना सकेंगे। पहले कई राज्यों में ऐसी व्यवस्था थी कि निर्धारित सीमा से अधिक छुट्टियां होने पर वे स्वतः समाप्त हो जाती थीं, लेकिन अब कर्मचारी हर साल अपनी छुट्टियों के बदले आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
छुट्टी मंजूर न होने पर भी राहत
छुट्टी नामंजूर होने पर भी फायदा, नहीं होगा नुकसान
कई बार कंपनियां कार्यभार का हवाला देकर कर्मचारियों की छुट्टी की अर्जी खारिज कर देती हैं, जिससे उनकी छुट्टियों के समाप्त होने का डर बना रहता है। नए श्रम कोड में यह प्रावधान है कि यदि कंपनी कर्मचारी की छुट्टी मंजूर नहीं करती है, तो वे छुट्टियां समाप्त नहीं होंगी। ऐसी छुट्टियों को बिना किसी ऊपरी सीमा के आगे के लिए 'कैरी फॉरवर्ड' किया जा सकेगा। यह नियम कंपनियों की मनमानी पर नियंत्रण लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लाभार्थियों की पहचान
किसे मिलेगा लाभ और कौन रहेगा दायरे से बाहर?
हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये सभी लाभ सभी के लिए नहीं हैं। यह नियम मुख्य रूप से उन 'वर्कर्स' के लिए बनाया गया है जिनकी मासिक सैलरी ₹18,000 तक है और जो गैर-मैनेजेरियल या गैर-एडमिनिस्ट्रेटिव पदों पर कार्यरत हैं। जो लोग सुपरवाइजरी या प्रबंधन पदों पर हैं और ₹18,000 से अधिक कमाते हैं, वे फिलहाल इन विशेष प्रावधानों के दायरे में नहीं आएंगे।