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भारत में फ्यूल राशनिंग की संभावना पर पीएम मोदी का बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में फ्यूल बचाने की अपील की है, जिससे लोगों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत में ईंधन की कमी हो रही है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। जानें फ्यूल राशनिंग क्या होती है और क्या भारत में इसे लागू किया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
 

प्रधानमंत्री मोदी की अपील


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की है। उन्होंने लोगों को वर्क फ्रॉम होम करने और ऑनलाइन शिक्षा अपनाने की सलाह दी है। पीएम मोदी के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत में ईंधन की कमी हो रही है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का ऑयल सप्लाई पर प्रभाव पड़ा है।


फ्यूल राशनिंग की परिभाषा

फ्यूल राशनिंग का अर्थ है जब सरकार पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की बिक्री पर प्रतिबंध लगाती है। जब तेल की कीमतें अत्यधिक बढ़ती हैं या घटती हैं, तो सरकार यह निर्धारित करती है कि एक व्यक्ति या वाहन को कितना ईंधन मिलेगा। इसका उद्देश्य ईंधन के अनुचित या अनावश्यक उपयोग को रोकना है, ताकि हर जरूरतमंद को ईंधन मिल सके।


क्या भारत में फ्यूल कोटा लागू होगा?

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भारत में फ्यूल राशनिंग नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई योजना नहीं है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने एक कार्यक्रम में कहा, "घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है। राशनिंग जैसी कोई बात नहीं होने वाली है।" इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले से ही अतिरिक्त तेल खरीद लिया है और पुराने सप्लायर्स से भी अधिक तेल मंगवाया है। इसलिए, लोगों को फ्यूल राशनिंग या कोटा की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।


भारत का ईंधन स्टॉक

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भारत के पास लगभग 60 दिन का पेट्रोल-डीजल और 45 दिन का एलपीजी स्टॉक है। वेस्ट एशिया में संकट के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल दो साल पुरानी कीमतों पर बिक रहे हैं। इससे सरकार और कंपनियों को प्रतिदिन 1000 से 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। हालांकि, आम जनता को इस महंगाई का असर अब तक नहीं महसूस हुआ है।