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भारत में शिक्षा और तकनीकी नवाचार की वास्तविकता

भारत में शिक्षा की स्थिति और तकनीकी नवाचार की वास्तविकता पर एक गहन दृष्टि। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के एक्सपो में प्रदर्शित रोबोडॉग ने भारत की छवि को कैसे प्रभावित किया? जानें इस लेख में कि कैसे तकनीकी शिक्षा की कमी और पेटेंट की स्थिति ने शिक्षा प्रणाली को प्रभावित किया है। क्या यह केवल एक विश्वविद्यालय की कहानी है, या यह पूरे देश की हकीकत है? पढ़ें पूरी जानकारी के लिए।
 

भारत में शिक्षा की स्थिति

भारत में शिक्षा, विशेषकर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, की वास्तविकता का एक उदाहरण इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक्सपो में देखने को मिला। गलगोटिया यूनिवर्सिटी, जो एनआईआरएफ रैंकिंग में उच्च स्थान पर है, ने अपने एक्सपो में एक रोबोडॉग का प्रदर्शन किया। यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने बताया कि इसका नाम ओरायन है और इसे उनके सेंटर ऑफ एक्सलेंस में विकसित किया गया है।


रोबोडॉग की असली कहानी

कुछ ही घंटों में यह स्पष्ट हो गया कि यह रोबोडॉग वास्तव में चीन में निर्मित है, जिसकी कीमत दो से ढाई लाख रुपए है। इसी यूनिवर्सिटी ने कोरिया का बना एक ड्रोन भी प्रदर्शित किया। यह केवल गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मामला नहीं है; अन्य संस्थानों की भी जांच की जानी चाहिए।


भारत की छवि पर असर

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के इस प्रदर्शन ने भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाया। चीन की वेबसाइट्स पर भारत का मजाक उड़ाया गया, और कुछ भारतीय मीडिया में भी इसका मजाक बना। लेकिन जल्द ही यह खबर आई कि यूनिवर्सिटी एआई रिसर्च पर 350 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।


तकनीकी शिक्षा की कमी

यह शर्मनाक है कि जो रोबोडॉग प्रदर्शित किया गया, वह तकनीक का सबसे बुनियादी मॉडल है। ऐसे रोबोट पहले से ही दुनिया में मौजूद हैं। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और छात्रों ने इस तकनीक पर आधारित कोई उत्पाद नहीं बनाया।


एआई का दुरुपयोग

भारत में एआई का नाम लेकर लोगों को कैसे बेवकूफ बनाया जाता है, इसका एक उदाहरण हाल ही में उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। एक शिक्षक ने एक पुतले को साड़ी पहनाकर उसे एआई शिक्षक के रूप में प्रस्तुत किया।


पेटेंट की स्थिति

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने पिछले वर्ष 1300 से अधिक पेटेंट के लिए आवेदन किया, जबकि देश के सभी आईआईटी मिलकर भी 800 पेटेंट के करीब ही आवेदन कर सके। यह दर्शाता है कि तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में कमी है।


शिक्षा मंत्रालय के मानक

भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने एनआईआरएफ के मानकों में यह भी शामिल किया है कि कितने पेटेंट का आवेदन किया गया है। अधिक आवेदन करने पर उच्च रैंकिंग मिलती है, जिससे छात्रों को आकर्षित किया जाता है।


गलगोटिया यूनिवर्सिटी का उदाहरण

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने पिछले तीन दशकों में निजी शिक्षा प्रणाली का प्रतिनिधित्व किया है। यह विश्वविद्यालय मध्य वर्ग के परिवारों को बड़े सपने दिखाकर उन्हें आकर्षित करता है।


छात्रों की वास्तविकता

हालांकि, इन विश्वविद्यालयों से निकले अधिकांश छात्रों को नौकरी नहीं मिलती। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एआई समिट में एक छात्र का जिक्र किया, जो बीटेक करके यूट्यूब का इन्फ्लुएंसर बन गया है।