भारत में स्टारलिंक सेवा पर इलॉन मस्क के संदेह और सुरक्षा चिंताएं
स्टारलिंक की स्थिति और भारत की चिंताएं
ईरान में इंटरनेट बंद होने के बावजूद स्टारलिंक की सेवा जारी रहने से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह चिंता इस बात को लेकर है कि संकट के समय भारत इस सेवा को नियंत्रित नहीं कर पाएगा।
इलॉन मस्क ने संकेत दिया है कि उनकी कंपनी स्पेस-एक्स की स्टारलिंक सेवा को भारत में कुछ बड़े पूंजीपतियों ने रोक रखा है। उनके इशारे का संदर्भ मुकेश अंबानी और सुनील भारती मित्तल की कंपनियों की ओर है। भारत के दूरसंचार क्षेत्र में इनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए मस्क का यह संदेह कुछ हद तक सही प्रतीत होता है। हालांकि, पिछले वर्ष अंबानी की जियो और मित्तल की एयरटेल ने स्टारलिंक के विक्रेता बनने की इच्छा जताई थी, जो कि अमेरिकी बाजार में भारतीय पूंजीपतियों के टकराव से बचने की रणनीति का परिणाम था।
स्पेस-एक्स ने भारत में आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया है, लेकिन अब तक अपनी उपग्रह इंटरनेट सेवा शुरू नहीं कर पाई है। इसके पीछे नई भू-राजनीतिक चुनौतियों का होना संभव है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में स्टारलिंक के उपयोग से वहां की संप्रभुता का उल्लंघन हुआ, जिससे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारत में यह सवाल उठता है कि भविष्य में किसी भू-राजनीतिक संकट के दौरान स्टारलिंक पर भरोसा करना कितना सुरक्षित होगा। ईरान में इंटरनेट बंद होने के बावजूद स्टारलिंक की सेवा चलती रही, जिससे भारत का यह डर और भी मजबूत हुआ है कि संकट के समय वह इस ऑपरेटर को नियंत्रित नहीं कर पाएगा।
हालांकि, यह हैरान करने वाला है कि बिना सुरक्षा चिंताओं का आकलन किए स्टारलिंक को पहले ही मंजूरी दे दी गई। अब सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अंतिम मंजूरी को रोकना उचित हो सकता है, लेकिन इससे भारत की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। फिर भी, भारत सरकार को मस्क के दबाव में नहीं आना चाहिए। ऐसे निर्णयों में राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की प्राथमिकता होनी चाहिए।