भारत, रूस और चीन की आर्थिक साझेदारी का वैश्विक प्रभाव
भारत, रूस और चीन की आर्थिक साझेदारी
नई दिल्ली: यदि भारत, रूस और चीन के बीच एक मजबूत आर्थिक सहयोग स्थापित होता है, तो इसका प्रभाव केवल इन तीन देशों तक सीमित नहीं रहेगा। चीन एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र है, रूस ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, और भारत एक तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है। इन तीनों की संयुक्त ताकत BRICS का वैश्विक प्रभाव बढ़ा सकती है। हालांकि, भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि BRICS को पश्चिम के खिलाफ एक मोर्चा बनाने के बजाय गैर-पश्चिमी देशों के सहयोग का मंच माना जाना चाहिए।
भारत, रूस और चीन की आर्थिक ताकतों को मिलाकर देखा जाए तो इनके पास एक विशाल बाजार, बड़ी जनसंख्या, ऊर्जा संसाधन और मजबूत उत्पादन क्षमता है। इस स्थिति में, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज हो सकती हैं, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, एक नई साझा मुद्रा की स्थापना आसान नहीं होगी, क्योंकि BRICS के भीतर आर्थिक नीतियों और देशों के हितों में काफी भिन्नता है।
भारत-चीन के बीच सबसे बड़ी चुनौती
भारत के लिए चीन के साथ संबंध इस परिदृश्य का सबसे संवेदनशील पहलू हैं। सीमा विवाद और लंबे समय से चल रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी बनी हुई है। ऐसे में, भारत किसी ऐसे समूह का हिस्सा नहीं बनना चाहता जहां चीन का प्रभाव पूरी तरह से हावी हो। भारत अमेरिका, यूरोप और जापान के साथ भी अपने व्यापार और तकनीकी संबंधों को मजबूत कर रहा है, इसलिए उसकी नीति किसी एक शक्ति के साथ पूरी तरह से खड़े होने की नहीं है।
रूस और चीन से अलग है भारत का रास्ता
BRICS के प्रारंभिक चरण में चीन और रूस का प्रभाव काफी मजबूत माना जाता था। फिर भी, भारत ने इस मंच को संतुलित बनाए रखने की कोशिश की है। भारत का मानना है कि BRICS को पश्चिम-विरोधी संगठन के बजाय गैर-पश्चिमी सहयोग का मंच बनाना चाहिए। ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से भी इस विचार को समर्थन मिला है। इसी कारण, BRICS में रहते हुए भारत अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखता है।
BRICS में भारत की बढ़ती भूमिका
भारत ने BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और के. वी. कामथ इसके पहले अध्यक्ष बने। भारत ने UPI, आधार और डिजिलॉकर जैसे डिजिटल समाधानों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया है। BRICS के विस्तार में भारत ने संतुलित सदस्यता पर जोर दिया है। इंडोनेशिया का जुड़ना भी संगठन के विस्तार का हिस्सा है। वहीं, अमेरिका BRICS में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क है, जबकि भारत समूह के भीतर शक्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।