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भारतीय नौसेना का पोत सुदर्शिनी अमेरिका से पुर्तगाल के लिए रवाना

भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोहों में भाग लेने के बाद अब पुर्तगाल के लिए रवाना हो गया है। इस यात्रा के दौरान, पोत ने भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया और विभिन्न देशों की नौसेनाओं के साथ सहयोग को मजबूत किया। जानें इस यात्रा की विशेषताएँ और इसके उद्देश्य।
 

आईएनएस सुदर्शिनी की यात्रा

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 27 जुलाई - भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत, आईएनएस सुदर्शिनी, अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के समारोहों में भाग लेने के बाद अब पुर्तगाल के लिए निकल चुका है। रक्षा मंत्रालय ने दिल्ली में एक बयान जारी करते हुए बताया कि यह पोत ‘लोकायन-26’ अभियान के तहत 25 जुलाई को बोस्टन से रवाना हुआ।


बयान में कहा गया है कि आईएनएस सुदर्शिनी अब पुर्तगाल के अजोरेस द्वीपसमूह के पोंटा डेलगाडा की ओर बढ़ रहा है, और यह भारत की समुद्री शक्ति, पेशेवर कौशल और सद्भावना का प्रतीक बना रहेगा। अमेरिका में अपने प्रवास के दौरान, सुदर्शिनी ने ‘सेल-250’ समारोह और ‘इंटरनेशनल नेवल रिव्यू-250’ में भारत का प्रतिनिधित्व किया।


समुद्री सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

इस दौरान, पोत ने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करते हुए विभिन्न देशों की नौसेनाओं के साथ साझेदारी को भी मजबूत किया। सुदर्शिनी ने नॉरफॉक, बाल्टीमोर, न्यूयॉर्क और बोस्टन में आयोजित ‘सेल-250’ कार्यक्रमों में भाग लिया, जहां उसने विभिन्न देशों के गणमान्य व्यक्तियों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक प्रतिनिधियों की मेज़बानी की। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन गतिविधियों ने समुद्री सहयोग और मित्रता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से उजागर किया।


कमांडर रविकांत नंदूरी के नेतृत्व में, आईएनएस सुदर्शिनी ने ‘सेल-250 मैरीलैंड’ और ‘एयरशो बाल्टीमोर’ में भी भाग लिया।


आईएनएस सुदर्शिनी की विशेषताएँ

इन आयोजनों में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विभिन्न देशों के ऊंचे मस्तूल वाले पारंपरिक नौकायन पोत, सैन्य पोत और हवाई प्रदर्शन एक साथ आयोजित किए गए। सुदर्शिनी एक तीन मस्तूल वाला बार्क प्रकार का नौकायन पोत है, जिसकी लंबाई 54 मीटर है। इसमें 20 पाल, लगभग 7.5 किलोमीटर लंबी रस्सियाँ और 1.5 किलोमीटर लंबी तार वाली रस्सियाँ हैं।


यह पोत पाल और इंजन दोनों के सहारे संचालित होता है और इसमें पांच अधिकारी, 31 नौसैनिक और प्रशिक्षण के लिए 30 कैडेट तैनात रहते हैं। यह एक बार में कम से कम 20 दिन तक समुद्र में रह सकता है। आईएनएस सुदर्शिनी ने इस वर्ष 20 जनवरी को कोच्चि से ‘लोकायन-26’ नामक अंतरमहासागरीय अभियान की शुरुआत की थी।


इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समुद्री संपर्क को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को मजबूत करना और भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं का प्रदर्शन करना है।