भारतीय पर्यटकों की छवि: संस्कृति और नागरिकता की जिम्मेदारी
भारतीय पर्यटकों की छवि पर चर्चा
शिक्षा प्रणाली में नागरिकता और नैतिक मूल्यों की कमी एक गंभीर मुद्दा है। परिवारों में यह सोच प्रचलित है कि 'जब तक कोई पकड़ा न जाए, तब तक जो मन आए वो करो।' विदेशों में भारतीय समुदाय को मेहनती और सफल माना जाता है, लेकिन कुछ निचले और मध्यम वर्ग के पर्यटक इस छवि को धूमिल कर रहे हैं। पहले कम यात्रा करने वाले ये लोग अब सस्ती उड़ानों और पैकेज टूर के कारण अधिक यात्रा कर रहे हैं।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर भारतीय पर्यटकों से जुड़े वीडियो फिर से चर्चा का विषय बन गए हैं। गुजरात के गरबा नृत्य का प्रदर्शन विदेशी एयरपोर्टों और अन्य वैश्विक स्थलों पर किया गया, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा है। यह सवाल उठता है कि क्या भारतीय पर्यटक वास्तव में बदतमीजी कर रहे हैं या फिर हमें गलत तरीके से देखा जा रहा है?
यह केवल कुछ वायरल वीडियो का मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों भारतीयों के विदेश यात्रा के बढ़ते रुझान और सांस्कृतिक समझ का भी है। भारत तेजी से बढ़ते पर्यटन स्रोत बाजार के रूप में उभर रहा है। कोविड महामारी के बाद, विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। 2025-26 में लाखों भारतीय यूरोप, अमेरिका, एशिया और मध्य पूर्व के देशों में यात्रा करेंगे। लेकिन कुछ घटनाएं पूरे देश की प्रतिष्ठा को धूमिल कर रही हैं।
एयरपोर्ट पर गरबा नृत्य करना, चीन की ग्रेट वॉल पर नाचना, कतार तोड़ना, और शोर मचाना जैसे वीडियो तेजी से वायरल होते हैं। इनमें से कई वीडियो संदर्भ से बाहर हो सकते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली घटनाएं एक पैटर्न बनाती हैं।
यह स्वीकार करना आवश्यक है कि हर देश में कुछ पर्यटक समस्याएं उत्पन्न करते हैं। चीनी पर्यटकों को भी भीड़ और शोर के लिए आलोचना का सामना करना पड़ता है, और अमेरिकी पर्यटक अक्सर अहंकारी माने जाते हैं। लेकिन भारतीय पर्यटकों की समस्या की गहराई अलग है। भारत में नागरिक भावना की कमी एक बड़ी चुनौती है। सड़कों पर कूड़ा फेंकना, कतार में धक्का-मुक्की करना, और सार्वजनिक स्थानों पर शोर मचाना, ये सब आदतें हैं जो विदेशों में भी दिखाई देती हैं।
कई भारतीय पर्यटक पहली बार विदेश यात्रा करते हैं और उत्साह में स्थानीय नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं। गरबा एक जीवंत त्योहार नृत्य है, लेकिन इसे एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर करना अनुशासन का उल्लंघन है। इसी तरह, ऐतिहासिक स्थलों पर चढ़ना या स्थानीय लोगों की असुविधा पैदा करना सांस्कृतिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है। सोशल मीडिया का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। एक वीडियो वायरल होने पर पूरा समुदाय निशाने पर आ जाता है।
आंकड़ों के अनुसार, 2019 की तुलना में भारत से विदेश यात्रा करने वालों की संख्या दोगुनी हो गई है। लेकिन यात्रा एजेंसियां और सरकारें पर्यटकों को पूर्व-प्रशिक्षण देने में पीछे रह गई हैं। कई समूह टूर में पर्यटक एक-दूसरे को उत्साहित करते हुए सीमाएं लांघ जाते हैं। नतीजतन, विदेशी होटल और एयरलाइंस भारतीयों को 'समस्या समूह' के रूप में देखने लगे हैं। कुछ देशों में भारतीय पर्यटकों के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है।
कुछ लोग तर्क करते हैं कि वायरल वीडियो संदर्भहीन हैं और भारतीयों को निशाना बनाया जा रहा है। यह आंशिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन जब भारतीय ही यह स्वीकार करते हैं कि 'हमारे यहां नागरिक भावना शून्य है', तो समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत की छवि को सुधारने के लिए एक बहुआयामी रणनीति की आवश्यकता है। सरकार को विदेश जाने वाले पर्यटकों के लिए अनिवार्य ऑनलाइन/ऑफलाइन वर्कशॉप शुरू करनी चाहिए। यात्रा एजेंसियों को स्थानीय रीति-रिवाज और कानून सिखाने चाहिए। वीजा आवेदन के साथ एक छोटा कोर्स अनिवार्य किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय को मिलकर 'जिम्मेदार भारतीय यात्री' अभियान चलाना चाहिए।
भारतीय दूतावासों को स्थानीय शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। स्कूलों में पर्यटन नैतिकता को समझाया जाना चाहिए ताकि बच्चे अपने घरों में जागरूकता फैलाएं। स्वच्छता, सम्मान और अनुशासन पर जोर दिया जाना चाहिए। युवा पीढ़ी को वैश्विक नागरिक बनाने की आवश्यकता है।
ग्रुप टूर लीडर्स को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि वे पर्यटकों को नियंत्रित रख सकें। गरबा जैसे नृत्यों को सही मंच पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत उत्साह को अनुशासित तरीके से व्यक्त करने की शिक्षा दी जानी चाहिए।
भारतीय पर्यटक समस्या नहीं, बल्कि अवसर हैं। हमारी विविधता, आतिथ्य और जीवंत संस्कृति दुनिया के लिए आकर्षण है। लेकिन कुछ लोगों की असंवेदनशीलता पूरे राष्ट्र को बदनाम कर रही है। यह समय है कि हम घरेलू स्तर पर नागरिक भावना में सुधार करें और विदेश यात्रा को जिम्मेदारी से करें।