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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, ईरान-अमेरिका तनाव का असर

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण गिरावट का सामना किया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में महत्वपूर्ण कमी आई है। जानें बाजार की स्थिति, प्रमुख लूजर्स और वैश्विक बाजारों का प्रभाव। इस लेख में हम इस गिरावट के पीछे के कारणों और संभावित परिणामों पर चर्चा करेंगे।
 

शेयर बाजार की स्थिति

मुंबई: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने लाल निशान में शुरुआत की। सुबह 9:19 बजे सेंसेक्स में 904 अंकों या 1.17 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे यह 76,424 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 263 अंकों या 1.09 प्रतिशत की कमी के साथ 23,927 पर था।


शुरुआती कारोबार में बाजार में व्यापक गिरावट देखी गई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी ऑटो सूचकांकों में सबसे अधिक नुकसान हुआ। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंजम्पशन, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी इन्फ्रा सहित लगभग सभी सूचकांक लाल निशान में थे।


लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कारोबार में कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 423 अंकों या 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 61,487 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 84 अंकों या 0.45 प्रतिशत की कमी के साथ 18,623 पर था।


सेंसेक्स में टाइटन, इंडिगो, इटरनल, एसबीआई, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, एचयूएल, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक, आईटीसी, एशियन पेंट्स, कोटक महिंद्रा बैंक और टीसीएस जैसे शेयरों में गिरावट आई।


एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। टोक्यो, हांगकांग और जकार्ता में गिरावट आई, जबकि शंघाई, बैंकॉक और सोल में बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे, जिसमें डाओ जोन्स स्थिर रहा और नैस्डैक 1.71 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बंद हुआ।


भारत में वैश्विक बाजारों की गिरावट का कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करना बताया जा रहा है।


ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने ईरानी प्रतिनिधियों के जवाब पढ़े हैं, जो उन्हें पसंद नहीं आए और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।


रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से जो शांति प्रस्ताव भेजा था, उसमें युद्ध समाप्त करने, होर्मुज स्ट्रेट को खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात की गई थी, लेकिन अमेरिका यूरेनियम सौंपने जैसी मांगों पर अड़ा हुआ है, जिससे तनाव की स्थिति बनी हुई है।