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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निवेशकों में सतर्कता

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण गिरावट का सामना किया। सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली कमी आई, जबकि व्यापक बाजारों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निवेशकों ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता पर अनिश्चितता के चलते सतर्कता बरती। जानें बाजार के विभिन्न सेक्टरों का प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
 

भारतीय शेयर बाजार का हाल

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण गिरावट के साथ कारोबार समाप्त किया। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों में हल्की कमी देखी गई।


बाजार के समापन पर, सेंसेक्स 122.56 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,988.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 34.55 अंक या 0.14 प्रतिशत घटकर 24,196.75 पर पहुंच गया।


हालांकि, व्यापक बाजारों ने बेंचमार्क सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया, जिसमें निफ्टी मिडकैप में 0.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.89 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।


सेक्टरवार प्रदर्शन

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल में 1.53 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.88 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसके अलावा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी एफएमसीजी ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी ऑटो और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में गिरावट आई।


नुकसान और लाभ

निफ्टी 50 में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, ओएनजीसी, एचडीएफसी लाइफ, टाइटन, एमएंडएम, भारती एयरटेल और अपोलो हॉस्पिटल्स शामिल रहे। वहीं, अदाणी एंटरप्राइजेज, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, इटरनल, अदानी पोर्ट्स और बीईएल के शेयरों में तेजी देखने को मिली।


निवेशकों की सतर्कता

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम वार्ता पर अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने सतर्कता बरती। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार का रुख अनिश्चित बना रहेगा, क्योंकि निफ्टी 24,300 के स्तर को पार करने में असफल रहा। यदि यह स्तर पार होता है, तो स्थायी तेजी संभव है, अन्यथा मुनाफावसूली का दौर शुरू हो सकता है।


भारतीय रुपया

गुरुवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 61 पैसे की वृद्धि के साथ 93.98 पर बंद हुआ, जबकि पिछले दिन यह 93.37 पर था। यह मजबूती मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कमी की उम्मीदों से आई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है।


इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों से सकारात्मक संकेतों ने भी बाजार की भावना को मजबूत किया है।