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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों को 3 लाख करोड़ का नुकसान

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गंभीर गिरावट आई, जिससे निवेशकों को 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण अमेरिका का नया टैरिफ प्लान और ईरान के साथ बढ़ता तनाव है। आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी बाजार पर दबाव डाल रही हैं। जानें इस गिरावट के पीछे के अन्य कारण और निवेशकों की चिंताएं।
 

मुंबई में शेयर बाजार की स्थिति

मुंबई: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गंभीर गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों प्रमुख सूचकांक 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर लाल निशान में बंद हुए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,069 अंक यानी 1.28 प्रतिशत की कमी के साथ 82,225.92 पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 1.12 प्रतिशत गिरकर 25,424.65 पर बंद हुआ। इस बिकवाली के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 469 लाख करोड़ रुपये से घटकर 466 लाख करोड़ रुपये रह गया, जिससे निवेशकों को 3 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स भी नुकसान में रहे, लेकिन उनका प्रदर्शन मुख्य सूचकांकों की तुलना में थोड़ा बेहतर रहा।


अमेरिकी टैरिफ का खतरा

अमेरिकी टैरिफ का मंडराता डर

इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका का नया टैरिफ प्लान माना जा रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को खारिज करने के बाद, ट्रंप प्रशासन अब 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 का उपयोग करने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने उन देशों को चेतावनी दी है जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करेंगे। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति का 'स्टेट ऑफ द यूनियन' संबोधन वैश्विक बाजारों पर नजर रखने का विषय बना हुआ है। यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के बीच डील रुकने की खबरों ने भी बाजार में टैरिफ को लेकर चिंता बढ़ा दी है।


ईरान के साथ बढ़ता तनाव

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव

निवेशकों की चिंता का एक और बड़ा कारण ईरान में हालात का तेजी से बदलना और अमेरिका के साथ उसका बढ़ता तनाव है। ईरान में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों और सरकार की कार्रवाई में हजारों लोगों की मौत की खबरों के बीच, अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है। दोनों देशों के बीच 26 फरवरी को होने वाली परमाणु वार्ता से पहले इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है।


आईटी सेक्टर में बिकवाली

आईटी शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव

बाजार में गिरावट के पीछे आईटी सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। निफ्टी आईटी इंडेक्स मंगलवार को लगभग 5 प्रतिशत गिर गया और इस महीने अब तक 21 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव और अमेरिका में उच्च ब्याज दरों की आशंका ने आईटी सेक्टर में बिकवाली को बढ़ावा दिया है। एंथ्रोपिक द्वारा क्लाउड कोड टूल के जरिए पुरानी प्रोग्रामिंग भाषाओं को ऑटोमेट करने के दावे के बाद, आईटी शेयरों पर दबाव बढ़ गया है।


कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय बाजार के लिए एक और बड़ा खतरा बन गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1 प्रतिशत बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो पिछले छह महीने के उच्चतम स्तर के करीब है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चा तेल महंगा होना आर्थिक स्थिरता पर दबाव डालता है, जिससे महंगाई बढ़ने और रुपये के कमजोर होने का संकेत मिलता है।


डॉलर की मजबूती का प्रभाव

मजबूत होता डॉलर और विदेशी पूंजी की वापसी का डर

डॉलर इंडेक्स में 0.20 प्रतिशत की वृद्धि ने भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित किया है। डॉलर की मजबूती से भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी का खतरा बढ़ गया है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों में निवेश करना शुरू किया था, लेकिन डॉलर की यह मजबूती और भारतीय बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।