भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को हुआ 15 लाख करोड़ का नुकसान
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का कारण
मुंबई- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि के चलते सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ गई, जिससे बाजार पर दबाव बना। इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 15 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
बाजार के प्रमुख बेंचमार्क में गिरावट
इस दौरान, घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क में भी गिरावट देखी गई। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर (78,918.90) से 1,862.15 अंकों की गिरावट के साथ 77,056.75 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी 24,450.45 से 582.4 अंक गिरकर 23,868.05 पर खुला। सुबह 9:28 बजे तक सेंसेक्स 2,404.42 अंकों यानी 3.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,514.48 पर ट्रेड कर रहा था, वहीं निफ्टी में 727.40 अंकों (2.97 प्रतिशत) की गिरावट आई और यह 23,723.05 पर कारोबार कर रहा था।
विस्तृत बाजार में गिरावट
बेंचमार्क इंडेक्स के साथ-साथ व्यापक बाजार भी दबाव में रहा। निफ्टी मिडकैप में लगभग 3.07 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में लगभग 3.18 प्रतिशत की गिरावट आई। सेक्टर के अनुसार, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे अधिक गिरावट देखी गई, जो 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो (3.99 प्रतिशत), निफ्टी बैंक (3.87 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (3.75 प्रतिशत) और निफ्टी एफएमसीजी (2.14 प्रतिशत) भी कमजोर प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, निफ्टी आईटी में सबसे कम 1.06 प्रतिशत की गिरावट आई।
सेंसेक्स पैक में गिरावट
सेंसेक्स पैक में, इंडिगो, एसबीआई, एलएंडटी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई और ये टॉप लूजर्स में शामिल रहे।
वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बढ़ने के बाद वैश्विक तेल बाजार में भी उथल-पुथल देखने को मिली। एशियाई कारोबार के शुरुआती सत्र में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) के दाम लगभग 21 प्रतिशत बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई। इसके बाद कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा की। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए एक छोटी कीमत है।
विश्लेषकों की राय
चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने बताया कि पिछले सप्ताह निफ्टी 50 में उतार-चढ़ाव और लगातार बिकवाली का दबाव देखा गया। तकनीकी दृष्टिकोण से, साप्ताहिक चार्ट पर कमजोरी की कैंडल और 50-सप्ताह के ईएमए के नीचे बंद होना बाजार में कमजोरी का संकेत है। फिलहाल, 24,700 से 25,150 का दायरा प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 23,850 और 23,600 के स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में देखे जा रहे हैं। यदि निफ्टी 23,500 के नीचे जाता है, तो बाजार में और गिरावट आ सकती है।
निवेशकों के लिए सलाह
विश्लेषकों ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में बढ़ती अस्थिरता को देखते हुए निवेशकों को सतर्क और अनुशासित रहने की सलाह दी जा रही है। गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना बेहतर माना जा रहा है। मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, निफ्टी में नई खरीदारी की रणनीति तभी अपनानी चाहिए जब इंडेक्स 25,000 के स्तर के ऊपर मजबूत और लगातार ब्रेकआउट दे। ऐसा होने पर बाजार में सकारात्मक धारणा मजबूत होगी और तेजी का नया चरण शुरू होने की संभावना बनेगी।