भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को हुआ बड़ा नुकसान
शेयर बाजार में बिकवाली का दौर
नई दिल्ली - भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार के दौरान जोरदार बिकवाली का सामना करना पड़ा। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट आई, जिससे मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव बढ़ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने निवेशकों की चिंता को बढ़ा दिया।
दोपहर लगभग 1:32 बजे सेंसेक्स में 1,042.86 अंक यानी 1.43% की गिरावट आई, जिससे यह 71,595.84 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी 50 में भी 360.65 अंक यानी 1.59% की गिरावट देखी गई, जो 22,242.40 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 में लगभग 1.98% की कमी आई, जबकि बैंक निफ्टी में लगभग 0.80% की गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट का असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा, जिससे BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों के मार्केट कैप में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान है।
फिनटेक कंपनियों में भारी गिरावट
पेटीएम और मोबिक्विक में 7% तक गिरावट
फिनटेक कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। पेटीएम और मोबिक्विक के शेयर लगभग 7% तक टूट गए, जबकि पाइन लैब्स में लगभग 3.1% की गिरावट आई। डिजिटल पेमेंट से जुड़ी मर्चेंट फीस के लागू होने की तारीख आगे बढ़ने की खबरों के कारण इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा।
ITC के शेयर भी करीब 3% नीचे फिसल गए। कंपनी में कई ब्लॉक डील्स के जरिए बड़ी संख्या में शेयरों के कारोबार के बाद स्टॉक में बिकवाली तेज हुई।
अडानी ग्रुप के शेयरों पर दबाव
अडानी ग्रुप के शेयर भी दबाव में
बाजार की व्यापक गिरावट का असर अडानी ग्रुप के शेयरों पर भी देखने को मिला। अडानी एंटरप्राइजेज में करीब 8% की गिरावट आई, जबकि अडानी पोर्ट्स 4% से अधिक नीचे रहा। अडानी ग्रीन एनर्जी में लगभग 9% की कमी आई। अडानी पावर, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी टोटल गैस में भी कमजोरी रही।
सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जिसमें 3% से अधिक की गिरावट आई। निफ्टी एनर्जी इंडेक्स भी करीब 2% नीचे कारोबार करता नजर आया।
बाजार गिरने के प्रमुख कारण
बाजार गिरने की 4 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ा सकता है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। भारतीय इक्विटी बाजार से बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी निकलने के कारण प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बढ़ा है।
3. ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख
RBI की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की आशंका से शेयर बाजार में जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित होती है।
4. कमजोर वैश्विक संकेत
एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने भारतीय बाजार की धारणा को और कमजोर किया। अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और ऊंची बॉंड यील्ड के कारण निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल में तेजी, विदेशी फंड की निकासी, वैश्विक अनिश्चितता और मौद्रिक नीति को लेकर सख्ती जैसे कई कारण एक साथ बाजार पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक बाजारों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी।