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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों में चिंता का माहौल

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बना। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के पीछे आईटी सेक्टर में बिकवाली, विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली और वैश्विक संकट के संकेत शामिल हैं। जानें इस गिरावट के कारण और इसके प्रभाव के बारे में।
 

मुंबई में निवेशकों के लिए निराशाजनक दिन

मुंबई: शुक्रवार को दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के लिए एक कठिन दिन साबित हुआ। भारतीय शेयर बाजार, जो पिछले पांच दिनों से रिकॉर्ड ऊंचाई पर था, मुनाफे की वसूली और वैश्विक दबाव के कारण भारी गिरावट का सामना करना पड़ा। सेंसेक्स दोपहर के समय 900 अंकों से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी ने भी 250 से ज्यादा अंक खो दिए। फार्मा सेक्टर को छोड़कर अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।


आईटी सेक्टर में बिकवाली का असर

इस गिरावट का मुख्य कारण सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में हुई भारी बिकवाली थी। वैश्विक कंपनी एक्सेंचर द्वारा कमजोर मांग की चेतावनी के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 6 प्रतिशत गिर गया। इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, विप्रो और एचसीएल टेक जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की। वैश्विक स्तर पर तकनीकी सेवाओं की घटती मांग ने भारतीय आईटी कंपनियों के मुनाफे और भविष्य की विकास दर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली का प्रभाव

घरेलू बाजार पर दबाव डालने में विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने नकद बाजार में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे, जिससे बाजार का विश्वास कमजोर हुआ। इस हफ्ते की शुरुआत में बिकवाली की गति थोड़ी धीमी हुई थी, लेकिन एक बार फिर विदेशी फंड्स का बाहर जाना घरेलू बाजार के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।


वैश्विक संकट और निवेशकों का डर

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में गिरावट आई, जबकि दक्षिणी लेबनान में नए सैन्य कार्रवाई और अमेरिका-ईरान वार्ता में देरी ने निवेशकों को चिंतित कर दिया। इस अनिश्चितता के कारण बाजार का डर मापने वाला इंडेक्स 'इंडिया विक्स' लगभग 6 प्रतिशत तक बढ़ गया। जब भी विक्स में वृद्धि होती है, बाजार में अस्थिरता और गिरावट की आशंका बढ़ जाती है।


मुनाफावसूली का दौर

पिछले पांच सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी ने जिस तेजी से बढ़त हासिल की थी, उसके बाद बाजार में सुधार आना स्वाभाविक था। कई बड़े और खुदरा निवेशकों ने इस ऊंचे स्तर पर अपनी पोजीशन को हल्का करना बेहतर समझा और भारी मुनाफावसूली की। इस चौतरफा दबाव के चलते खरीदारों ने बाजार से दूरी बना ली, जिसके परिणामस्वरूप दोनों प्रमुख सूचकांकों ने अपनी पिछली बढ़त खो दी और बाजार भारी नुकसान के साथ बंद हुआ।