भोपाल में गधों को गुलाब जामुन खिलाकर बारिश की कामना
भोपाल में अनोखा आयोजन
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून की कमजोर स्थिति के बीच एक अनोखा कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां के निवासियों ने गधों को गुलाब जामुन खिलाकर अच्छी बारिश की प्रार्थना की। इस विशेष आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए, और इसके वीडियो तथा तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गईं।
आयोजन का उद्देश्य
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि एक पुरानी लोक परंपरा का हिस्सा है। उनका मानना है कि जब बारिश कम होती है, तो ऐसे प्रतीकात्मक उपाय करने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और वर्षा होती है। इसी विश्वास के साथ, लोगों ने गधों को मिठाई खिलाकर बारिश की कामना की।
पहले बारिश कराने के लिए इंद्रा देव की पूजा होती थी लेकिन अब लोग गद्दो को पार्टी दे रहे हैं ,
— Gaurav Bharat (@gauravbharat30) July 18, 2026
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कमजोर पड़े मानसून को मनाने और अच्छी बारिश के लिए लोग गधों को गुलाब जामुन खिला रहे हैं ,
गद्दो के भी दिन लौट आये हैं और अब गद्दो का ही जमाना है। pic.twitter.com/kSkWmBnxh7
प्रार्थनाओं का उद्देश्य
इस आयोजन के दौरान, लोगों ने प्रदेश में अच्छी बारिश, किसानों की समृद्धि और भरपूर फसल की प्रार्थना की। उनका कहना था कि लगातार कम बारिश के कारण गर्मी और उमस बढ़ गई है। कई क्षेत्रों में खेती प्रभावित हो रही है और जल स्रोतों का जलस्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है।
गधों को गुलाब जामुन खिलाने का यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। कई लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। कुछ ने इसे लोक परंपरा से जोड़ा, जबकि अन्य ने इसे बारिश की उम्मीद में किया गया दिलचस्प प्रयास बताया।
मौसम विशेषज्ञों की राय
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश पूरी तरह से वैज्ञानिक मौसम प्रणालियों पर निर्भर करती है। मानसून की सक्रियता कम दबाव के क्षेत्र, हवाओं की दिशा और अन्य मौसम संबंधी परिस्थितियों से निर्धारित होती है। ऐसे पारंपरिक आयोजनों का मौसम पर वैज्ञानिक रूप से कोई प्रमाणित प्रभाव नहीं होता, लेकिन ये स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा हो सकते हैं।
भारत की लोक परंपराएं
भारत के विभिन्न हिस्सों में बारिश की कामना के लिए अलग-अलग लोक परंपराएं देखने को मिलती हैं। कहीं मेंढकों का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है, तो कहीं विशेष पूजा या अन्य पारंपरिक आयोजन किए जाते हैं। भोपाल का यह आयोजन भी उसी सांस्कृतिक परंपरा का एक उदाहरण माना जा रहा है।