भोपाल में रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की सख्त कार्रवाई
नगर निगम की कार्रवाई
भोपाल: भोपाल में रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, नगर निगम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में 100 से अधिक दुकानों, शोरूम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद कई बाजारों में शांति छा गई, जबकि व्यापारियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
किस-किस क्षेत्र में हुई कार्रवाई?
नगर निगम की टीमों ने रोहित नगर, गुलमोहर, बावड़िया कलां, अरेरा कॉलोनी और 10 नंबर मार्केट जैसे कई रिहायशी क्षेत्रों में कार्रवाई की। सील किए गए प्रतिष्ठानों के बाहर बोर्ड और पोस्टर लगाए गए, जिनमें यह जानकारी दी गई कि इन स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। नगर निगम का कहना है कि यह अभियान पिछले दो हफ्तों से लगातार चल रहा है।
नोटिस का वितरण
नगर निगम के अनुसार, अब तक लगभग 1800 संपत्ति मालिकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उन्हें वैध व्यावसायिक अनुमति प्रस्तुत करने या रिहायशी क्षेत्रों से अपने कारोबार को बंद करने के निर्देश दिए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि शनिवार की कार्रवाई कई मामलों में तीसरे नोटिस के बाद की गई है और आगे भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा।
व्यापारियों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई के दौरान 10 नंबर मार्केट समेत कई स्थानों पर व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और कार्रवाई जल्दबाजी में की गई। हालांकि, नगर निगम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नोटिस पहले ही निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी किए गए थे।
वार्ड 52 में एक दुकान सील करने के दौरान पूर्व पार्षद रामबाबू पाटीदार और नगर निगम कर्मचारियों के बीच बहस और हाथापाई की घटना भी हुई। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत कराया गया। इस घटना के बाद कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और व्यापारिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
व्यापारिक संगठनों की चिंताएं
फेडरेशन ऑफ ट्रेडर्स और भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से व्यावसायिक दरों पर बिजली बिल, संपत्ति कर और अन्य शुल्क चुका रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि शहर में लंबे समय से नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है और व्यापारियों के लिए वैकल्पिक व्यावसायिक क्षेत्र भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। व्यापारिक संगठनों ने स्थायी समाधान निकलने तक कार्रवाई रोकने की मांग की है।