मऊगंज में NEET छात्रा की आत्महत्या: मानसिक दबाव की गंभीरता पर सवाल
दुखद घटना से मऊगंज में शोक
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया है। NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की आत्महत्या ने उसके परिवार, रिश्तेदारों और गांव के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए एक त्रासदी है, बल्कि यह छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव की गंभीरता को भी उजागर करती है। मगनिया गांव की आकांक्षा चतुर्वेदी ने लंबे समय से चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखा था। परिवार के अनुसार, वह पढ़ाई में बहुत मेहनती थीं और डॉक्टर बनकर अपने माता-पिता का सपना पूरा करना चाहती थीं। हाल ही में हुए NEET में उन्हें अच्छे अंक मिलने की उम्मीद थी।
पढ़ाई के लिए आर्थिक संघर्ष
परिवार का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी की शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए। आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद, उन्होंने उसके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए कई बलिदान किए। परिवार ने बताया कि पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लोन लिया गया था। छात्रा को नागपुर में कोचिंग दिलाई जा रही थी ताकि वह अपनी तैयारी को बेहतर बना सके। बताया गया है कि छात्रा के पिता खेती से जुड़े हुए थे, लेकिन बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने अतिरिक्त काम भी किया। परिवार को विश्वास था कि इस बार परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन होगा और उनकी बेटी का डॉक्टर बनने का सपना पूरा होगा।
भावुक सुसाइड नोट
Last words: "I don't have courage to take the exam again, sorry Mom and Dad, I have ruined everything for you,
— Ramesh Tiwari (@rameshofficial0) June 3, 2026
The tragic suicide of 18-year-old NEET aspirant Akanksha Chaturvedi exposes the deadly cost of repeated exam scams and systemic failure. Her dreams were crushed by… pic.twitter.com/WGtY4BaUCs
घटना के बाद मिले सुसाइड नोट में छात्रा ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए भावुक बातें लिखी थीं। नोट में उसने इस बात का जिक्र किया कि उसे डर था कि वह दोबारा उसी स्तर की तैयारी नहीं कर पाएगी। उसने अपने माता-पिता के संघर्ष और आर्थिक बलिदान का भी उल्लेख किया। पुलिस ने नोट को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की सभी परिस्थितियों की जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा से जुड़े तनाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा को तेज कर दिया है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर अक्सर अत्यधिक दबाव होता है। ऐसे समय में परिवार, शिक्षकों और समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।