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मध्य-पूर्व में तेल निर्यात की सुरक्षा के लिए शिपिंग कंपनियों की नई रणनीति

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण शिपिंग कंपनियां अपने तेल निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए 'ट्रैकर बंद' करने की रणनीति अपना रही हैं। हालिया डेटा से पता चलता है कि कई बड़े कच्चे तेल के टैंकर अपनी पहचान छिपाकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार कर रहे हैं। इस स्थिति का वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। जानें इस नई रणनीति के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम।
 

शिपिंग कंपनियों की नई रणनीति

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरानी हमलों की आशंका के चलते, शिपिंग कंपनियां अब अपने तेल निर्यात को सुरक्षित रखने के लिए 'ट्रैकर बंद' करने की रणनीति अपना रही हैं। हालिया शिपिंग डेटा के अनुसार, पिछले सप्ताह दो बड़े कच्चे तेल के टैंकरों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर दिए और सफलतापूर्वक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार किया।


शिपिंग एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों ने इस उभरते चलन की पुष्टि की है, जिसे समुद्री सुरक्षा की भाषा में 'डार्क सेल' या 'घोस्ट शिपिंग' कहा जाता है।


जारी डेटा के अनुसार

सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, बहुत बड़े कच्चे तेल के वाहक (VLCC) 'बसरा एनर्जी' ने 1 मई को अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के ज़िरकू टर्मिनल से 2 मिलियन बैरल 'अपर ज़ाकुम' कच्चा तेल लादा और 6 मई को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाहर निकल गया। डेटा के अनुसार, पनामा का झंडा लगे इस जहाज़ ने 8 मई को फ़ुजैरा ऑयल टैंकर टर्मिनलों पर अपना माल उतारा।


यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि शिपिंग कंपनी 'सिनोकोर' के स्वामित्व वाले इस टैंकर को किसने चार्टर किया था। दफ़्तर के समय के बाद टिप्पणी के लिए किए गए अनुरोध पर सिनोकोर ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।


खाड़ी क्षेत्र में तेल निकालने के प्रयास

ADNOC और उसके खरीदारों ने हाल ही में मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में फँसे तेल को बाहर निकालने के प्रयास में, कच्चे तेल से लदे कई टैंकरों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़ारा है।


इसके अलावा, डेटा से पता चला कि एक और VLCC, 'कियारा M', रविवार को अपना ट्रांसपोंडर बंद करके खाड़ी से बाहर निकला। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि सैन मैरिनो का झंडा लगे इस टैंकर पर लदे 2 मिलियन बैरल इराकी कच्चे तेल को कहाँ उतारा जाएगा।


वैश्विक तेल बाजार पर असर

कच्चे तेल की कीमतें वर्तमान में $126 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। यदि टैंकरों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो बीमा प्रीमियम और शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में 'ट्रैकर बंद' करके जहाज़ों का निकलना यह दर्शाता है कि वैश्विक तेल निर्यात अब एक 'वॉर ज़ोन' जैसी परिस्थितियों में काम कर रहा है, जहाँ सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है।


अंतरराष्ट्रीय समाचार

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