मध्य प्रदेश में आबकारी कांस्टेबल परीक्षा में नकल का मामला: 12 उम्मीदवारों पर कार्रवाई
नकल के नए मामले का खुलासा
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में नकल की घटनाएं फिर से सामने आई हैं। हाल ही में आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में 12 उम्मीदवारों के असामान्य प्रदर्शन ने एमपी कर्मचारी चयन बोर्ड (एमपीईएसबी) को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। यह परीक्षा सितंबर 2025 में आयोजित की गई थी, जिसमें 1,10,032 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। 243 पदों के लिए आयोजित इस ऑनलाइन परीक्षा में रतलाम केंद्र से परीक्षा देने वाले इन 12 उम्मीदवारों ने सिस्टम को चौंका दिया है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है।
परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियाँ
सिस्टम अलर्ट से पता चला कि ये उम्मीदवार पहले आधे घंटे तक केवल स्क्रीन पर स्क्रॉल करते रहे, जबकि अंतिम 15 मिनट में सभी 100 सवालों के जवाब दे दिए। एमपीईएसबी के प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट प्रणीत सिजारिया ने बताया कि इस गति को सामान्य नहीं माना जा सकता। हर सवाल पर औसतन 9 सेकंड का समय लिया गया, जो असंभव है। जांच में यह पैटर्न सभी 12 उम्मीदवारों में समान पाया गया।
डिजिटल सबूत और CCTV फुटेज
एमपीईएसबी ने डेटा लॉग, समय विश्लेषण और CCTV फुटेज की जांच की। फुटेज में यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा से पहले मॉनिटर बदले गए थे या किसी अज्ञात व्यक्ति ने मदद की थी। उम्मीदवारों को बाहर से उत्तर मिलने का संदेह है। बोर्ड ने इसे धोखाधड़ी मानते हुए 5 फरवरी 2026 को परिणाम जारी होने पर इनकी उम्मीदवारी रोक दी। शिकायत के आधार पर जीरो FIR दर्ज की गई, जिसे बाद में रतलाम ट्रांसफर कर दिया गया।
कानूनी कार्रवाई और जांच
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत FIR दर्ज की है, जो धोखाधड़ी से संबंधित है। इसमें आरोपी उम्मीदवारों के अलावा एक अज्ञात व्यक्ति भी शामिल है। रतलाम पुलिस अब मामले की गहन जांच कर रही है। एमपीईएसबी ने कहा है कि ऐसे मामलों में सख्ती बरती जाएगी ताकि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। जांच से और खुलासे होने की संभावना है।
भर्ती प्रक्रिया पर प्रभाव
यह घटना 9 से 21 सितंबर 2025 के बीच हुई परीक्षा से संबंधित है। कुल 243 पदों के लिए लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया। नकल के इस मामले ने ईमानदार उम्मीदवारों में रोष पैदा किया है। बोर्ड ने पहले भी ऐसी गड़बड़ियों पर कार्रवाई की है, लेकिन डिजिटल नकल का यह नया तरीका चिंता का विषय बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में सिस्टम को और सख्त किया जाएगा।