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मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स चयन पर उठाए सवाल, मांगी पारदर्शिता

भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स 2026 के लिए चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि पारदर्शिता की आवश्यकता महसूस कर रही हैं। मनिका ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो वह कानूनी कार्रवाई का सहारा लेंगी। उनके बयान में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
 

मनिका बत्रा का चयन विवाद

नई दिल्ली : एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टेबल टेनिस टीम में शामिल न होने के बाद, मनिका बत्रा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने हाल ही में टीम से बाहर किए जाने पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की थी। अब, उन्होंने उन आरोपों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि वह विशेष व्यवस्था की मांग कर रही हैं।


मनिका ने कहा कि वह किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता महसूस कर रही हैं। उन्होंने टीम से बाहर किए जाने के निर्णय को मनमाना बताते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय खेल मंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है। इसके साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो वह कानूनी कार्रवाई का सहारा ले सकती हैं।


मनिका ने एक बयान में कहा, "पिछले 20 वर्षों में मुझे भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। मैंने अपने करियर में जीत और हार को स्वीकार किया है, लेकिन पारदर्शिता की कमी को स्वीकार करना कठिन है।"


उन्होंने आगे कहा, "मैंने सुना है कि लोग कह रहे हैं कि मैं एशियन गेम्स टीम में जगह चाहती हूं। मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि मैं चयन की मांग नहीं कर रही हूं, बल्कि केवल जवाब चाहती हूं। मुझे नहीं बताया गया कि मेरा चयन क्यों नहीं हुआ।"


मनिका ने अपनी विश्व रैंकिंग का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब वह 51वें स्थान पर हैं, तो उन्हें चयन के लिए क्यों अयोग्य माना गया। उन्होंने कहा कि टेबल टेनिस की रैंकिंग हर सप्ताह बदलती है और यह स्पष्ट होना चाहिए कि खिलाड़ियों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया।


उन्होंने कहा, "क्या चयन पिछले 12 महीनों, छह महीनों या किसी एक सप्ताह की रैंकिंग के आधार पर किया गया? यदि कोई खिलाड़ी लंबे समय तक शीर्ष-50 में रहता है और एक सप्ताह उसकी रैंकिंग 50 से 51 हो जाती है, तो क्या वह अचानक चयन के लिए अयोग्य हो जाता है?"


मनिका ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में केवल रैंकिंग नहीं, बल्कि खिलाड़ी के हालिया प्रदर्शन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने अच्छे प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कई शीर्ष एशियाई और चीनी खिलाड़ियों को हराया है।


उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऐतिहासिक महिला युगल कांस्य पदक जीतने वाली अयहिका मुखर्जी जैसे खिलाड़ियों को चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि चयन के निर्णय किस आधार पर लिए गए।


मनिका ने अंतिम चयन प्रक्रिया में वोटिंग के आधार पर उठाए गए सवालों पर भी चिंता जताई। उन्होंने पूछा कि यदि ऐसा हुआ है, तो खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार है कि निर्णय किसने और क्यों लिए। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।


मनिका ने यह भी सवाल उठाया कि क्या वोटिंग प्रणाली निष्पक्ष हो सकती है या उस पर व्यक्तिगत राय का असर पड़ सकता है। उन्होंने चयन समिति के सदस्यों के अनुभव पर भी सवाल उठाए।


उन्होंने कहा, "मेरी चिंता केवल अपने चयन को लेकर नहीं है, बल्कि पूरे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने को लेकर है।" उन्होंने कहा कि यदि उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिलता है, तो वह कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगी।