महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों की घोषणा
महाराष्ट्र सरकार का सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज
महाराष्ट्र सरकार ने शनिवार को राज्य के 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया और इसके साथ ही राहत उपायों की घोषणा की। इनमें फसल ऋण नियमों में छूट, भू-राजस्व में राहत और बिजली बिल में सब्सिडी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे फसल के नुकसान का त्वरित आकलन करें और आश्वासन दिया कि सूखे की स्थिति में राहत प्रयासों का केंद्र किसान होंगे।
सरकारी आदेश के अनुसार, 32 जिलों में फैले 265 तालुकों में राज्य का 74 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।
उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसानों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का निर्णय जमीनी स्तर पर आकलन के बाद किया जाएगा।
राज्य सरकार ने सूखे की स्थिति की घोषणा करने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अपने ‘सूखा प्रबंधन नियम 2016’ के तहत ‘ट्रिगर-1’ कदम लागू किया है।
‘ट्रिगर-1’ तब लागू होता है जब बारिश में 25 प्रतिशत से अधिक की कमी हो और 21 दिन तक सूखा बना रहे।
कृषि आयुक्त की रिपोर्ट में बताया गया है कि जून से बारिश में कमी और अन्य कारणों से 32 जिलों के 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सूखे से प्रभावित तालुकों की संख्या सबसे अधिक (74) है। इसके बाद अमरावती (56), नासिक (49), नागपुर (39), पुणे (35) और ठाणे (12) का स्थान है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, “हमारे राहत कार्यों का केंद्र किसान, खेतिहर मजदूर और अन्य श्रमिक होंगे। उन्हें राहत पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।”
सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित तालुकों में फसल के नुकसान का आकलन करें और सर्वेक्षण के दौरान तस्वीरें और जीपीएस डेटा एकत्र करें।
सरकार ने कई राहत उपायों की घोषणा की है, जिनमें भू-राजस्व में छूट, फसल ऋण नियमों को सरल बनाना और खेती में इस्तेमाल होने वाले पंपों के बिजली बिल में छूट शामिल हैं।
सरकारी प्रस्ताव में कहा गया है कि 7.5 हॉर्सपॉवर तक के खेती पंपों के बिजली बिल पहले ही माफ कर दिए गए थे।
इन उपायों में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क को माफ करना, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के नियमों में ढील देना, और पानी की कमी वाले गांवों में खेती के पंपों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति करना शामिल है।
सरकार ने कहा कि जल संरक्षण के काम और लोगों एवं पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था भी की जाएगी।
शनिवार को जारी सरकारी आदेश में कहा गया कि सूखा प्रभावित 265 तालुकों में किसानों को फसल के नुकसान के लिए आर्थिक मदद देने के संबंध में एक अलग सरकारी प्रस्ताव जारी किया जाएगा।
इस बीच, विपक्षी दलों ने सूखा घोषित करने में देरी के लिए राज्य सरकार की आलोचना की है।
कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि फडणवीस ने पहले विपक्ष पर सूखे के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया था।
शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि राज्य सरकार को राहत उपायों को लागू करने पर ध्यान देना चाहिए।
किसान सभा ने मांग की है कि लगातार दो खरीफ सीजन में फसल खराब होने से प्रभावित किसानों को ठोस आर्थिक मदद दी जाए।
अल नीनो की स्थिति के बीच राज्य में बारिश में 18.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है।