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मिडिल ईस्ट में बढ़ता सैन्य तनाव: अमेरिका और इजरायल की तैयारी

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां अमेरिका और इजरायल ईरान पर संभावित हमलों की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिका ने अपने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं, जबकि ईरान भी सैन्य अभ्यास कर रहा है। भारत ने अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की है। जानें इस क्षेत्र में क्या हो रहा है और आगे क्या हो सकता है।
 

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मिडिल ईस्ट, जिसे पश्चिम एशिया भी कहा जाता है, एक बार फिर से गंभीर संकट की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी नौसेना के दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही क्षेत्र में तैनात हैं, और एक तीसरा भी वहां पहुंचने वाला है। इस बीच, भारत और अमेरिका ने नई यात्रा सलाह जारी की है, जबकि इजरायल द्वारा ईरान की सीमा के निकट सैन्य उड़ानों की खबरें आ रही हैं। हाल के घटनाक्रम स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका और इजरायल ईरान पर बड़े हवाई हमलों की योजना बना रहे हैं, जो पहले से कहीं अधिक घातक हो सकते हैं। बातचीत का कोई रास्ता नहीं बचा है, और दोनों पक्षों से तीखी चेतावनियाँ जारी हैं। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी समय एक नया सैन्य टकराव भड़क सकता है। रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल में आगामी चुनाव इस हमले की समयावधि को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


तीसरा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात

अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट', तैनात किया है। इसके साथ 'यूएसएस माकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप' भी है, जिसमें दो एम्फीबियस लैंडिंग जहाज शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन जहाजों पर 7,000 से अधिक नाविक और 2,000 मरीन मौजूद हैं। इसका अर्थ है कि नवंबर की शुरुआत तक अमेरिकी नौसेना की उपस्थिति इस क्षेत्र में असामान्य रूप से बढ़ जाएगी। यहाँ 20,000 से अधिक नाविक और मरीन होंगे, साथ ही सैकड़ों विमान भी तैनात होंगे। इससे अमेरिका को ईरान पर हमले तेज करने के कई विकल्प मिलते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक सैनिकों की तैनाती ईरान के साथ बातचीत के लिए एक रणनीति हो सकती है।


ईरान की सैन्य तैयारियाँ

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान देशभर में सैन्य अभ्यास कर रहा है, जिसमें एक साथ 30 बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण भी शामिल है। तेहरान से आ रही खबरों से पता चलता है कि वहां के कमांडर संभावित संघर्ष के लिए तैयार हैं। हाल ही में IRGC ने एक नए हथियार का प्रदर्शन किया है, जिसे 'फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' कहा जाता है। IRGC के प्रवक्ता ने कहा है कि अगर सैन्य तनाव बढ़ता है, तो वे अपनी नई लंबी दूरी की मिसाइलों का उपयोग कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ये मिसाइलें ब्रिटेन में अमेरिकी एयरबेस या जर्मनी के रामस्टीन स्थित लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंच सकती हैं।


अमेरिका की सुरक्षा चेतावनियाँ

संघर्ष की संभावनाओं को देखते हुए, अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए नई सुरक्षा चेतावनियाँ जारी की हैं। सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में अमेरिकी दूतावासों ने चेतावनी दी है कि हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। इन चेतावनियों में अमेरिकियों से कहा गया है कि वे उड़ानों के रद्द होने और हवाई क्षेत्र के बंद होने की स्थिति के लिए तैयार रहें। सऊदी अरब में ईरान समर्थित हूती हमलों ने तनाव को और बढ़ा दिया है।


भारत की यात्रा सलाह

भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी की है, जिसमें सऊदी अरब में मौजूद भारतीयों से 'पूरी सावधानी' बरतने को कहा गया है। यह सलाह रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले के बाद जारी की गई थी। इसके अलावा, सभी भारतीय एयरलाइनों ने 31 अक्टूबर तक सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं।


इजरायल की सैन्य गतिविधियाँ

इस बीच, इजरायल ने भी अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। हाल ही में इजरायल के दर्जनों लड़ाकू विमानों ने ईरानी सीमा के पास उड़ानें भरीं। यह घटनाक्रम अमेरिकी रक्षा सचिव और इजरायली प्रधानमंत्री के बीच हुई एक गुप्त मुलाकात के समय हुआ। इजरायल ने इसे एक 'प्रशिक्षण अभ्यास' बताया है, जिसका उद्देश्य अपनी ताकत का प्रदर्शन करना था।