मोदी का दीपोत्सव: लाभार्थियों की राजनीति का नया चेहरा
मोदी का दीपोत्सव और हिंदू धर्म का नया स्वरूप
क्या भाजपा और संघ परिवार की प्रशंसा की जाए? नरेंद्र मोदी का शासन हिंदुओं से वैसी ही पूजा कराना चाहता है, जैसे दिवाली पर लक्ष्मीजी की कृपा के लिए दीया जलाया जाता है।
17 सितंबर की शाम को मोदी का दीपोत्सव शुरू होगा, जो एक महीने तक चलेगा। यह अवधि लक्ष्मीजी के दीपोत्सव से भी अधिक है। पहले, भारत की सेक्युलर सरकार में ऐसा नहीं होता था कि अधिकारी गांव-गांव जाकर लोगों को दीये बांटें और फोटो खिंचवाएं। अब यह सब कुछ सोशल मीडिया पर फैलाया जाएगा, जिससे दुनिया को यह संदेश मिले कि भारत में हिंदुओं के लिए प्रधानमंत्री भगवान के समान हैं।
मोदी के शासन में बारह वर्षों में, उन्होंने घर-घर जाकर लाभ पहुंचाने का काम किया है। भाजपा और संघ के कार्यकर्ता सरकारी राशन, सब्सिडी, और अन्य योजनाओं की सूची लेकर गरीबों के पास जाएंगे और उनसे कहेंगे कि मोदी का दीया जलाना उनका कर्तव्य है।
भारत के लोकतंत्र में 2014 से पहले लोग स्वाभिमानी नागरिक थे, लेकिन अब उन्हें केवल 'लाभार्थी' के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी के शासन के सबसे बड़े लाभार्थी कौन हैं? यह गरीब नहीं, बल्कि वे अरबपति हैं जिन्होंने सरकार को बंधक बना रखा है। गरीबों को यह नहीं पता कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के समय भारत के सौ सबसे अमीर लोगों की संपत्ति 346 अरब डॉलर थी, जो अब 1.1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गई है।
World Inequality Lab के अनुसार, भारत के शीर्ष 1% लोगों के पास 40.1% संपत्ति है, जबकि नीचे की आधी आबादी के पास केवल 6.4% संपत्ति है।
मोदी का दीपोत्सव असल में उन गरीबों के लिए है जो राशन और सब्सिडी के लाभार्थी हैं। ये लोग कैमरे के सामने दीया जलाकर फोटो खिंचवाएंगे, जबकि अरबपति अपनी संपत्ति में वृद्धि का आनंद लेंगे।
संघ ने 2025-26 में अपना शताब्दी वर्ष मनाया, लेकिन अब मोदी के लाभार्थी संघ प्रचारक और स्वयंसेवक मोदी के नाम का दीया जलवा रहे हैं। क्या संघ के प्रमुख को भी मोदी के लिए दीया नहीं जलाना चाहिए?
कुल मिलाकर, राजा सेवा की बात करता है, पार्टी संकल्प की, और सरकार लाभार्थियों की। अधिकारी और कार्यकर्ता दीया लेकर पहुंचते हैं, और फिर कैमरा गरीबों से कहता है कि मोदीजी का फोटो नहीं देखा? अगले साल और खैरात मिलेगी।