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यमुना नदी की सफाई: सरकार के दावों की सच्चाई

दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर सरकार के दावों की सच्चाई हालिया रिपोर्ट में उजागर हुई है। प्रदूषण नियंत्रण समिति की रिपोर्ट में फीकल कोलीफॉर्म के खतरनाक स्तर और जलीय जीवन पर संकट की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट जारी करने में हुई देरी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की विफलता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

यमुना की स्थिति पर चिंता


दिल्ली में नई सरकार के गठन के बाद यमुना नदी की सफाई को प्राथमिकता देने का वादा किया गया था, लेकिन हालिया रिपोर्ट ने इन दावों की सच्चाई को उजागर कर दिया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा नवंबर और दिसंबर 2025 में जारी की गई रिपोर्ट से स्पष्ट है कि यमुना की स्थिति अभी भी अत्यंत गंभीर बनी हुई है। सितंबर और अक्टूबर में आई बाढ़ के दौरान जो थोड़ी बहुत सफाई हुई थी, उसका प्रभाव अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है।


फीकल कोलीफॉर्म का खतरनाक स्तर

DPCC की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में बताया गया है कि यमुना में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 92,000 तक पहुंच गया है, जबकि सुरक्षित सीमा केवल 2,500 मानी जाती है। यह स्तर मानक से लगभग 37 गुना अधिक है, जो दर्शाता है कि नदी का पानी अत्यंत विषैला हो चुका है और इसमें सीधे सीवेज का गंदा पानी मिल रहा है।


जलीय जीवन पर संकट

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नवंबर 2025 में कई स्थानों पर घुलित ऑक्सीजन (DO) का स्तर शून्य पाया गया। ISBT ब्रिज और असगरपुर जैसे क्षेत्रों में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति का मतलब है कि वहां मछलियों और अन्य जलीय जीवों का जीवित रहना लगभग असंभव है। यह स्थिति पर्यावरण के लिए बेहद चिंताजनक है।


रिपोर्ट जारी करने में देरी

DPCC ने अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट समय पर जारी की थी, लेकिन नवंबर और दिसंबर की रिपोर्ट को महीनों तक रोके रखा गया। इन्हें जनवरी 2026 में सार्वजनिक किया गया, जिससे विभाग की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। आंकड़े बताते हैं कि बाढ़ के बाद जो अस्थायी सुधार दिखा था, वह कुछ ही हफ्तों में समाप्त हो गया।


एसटीपी की विफलता

सरकार ने यमुना की सफाई के लिए 1,816 करोड़ रुपये की योजनाओं की घोषणा की थी और 2028 तक एसटीपी की क्षमता 1500 MGD करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 37 में से 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मानकों पर खरे नहीं उतरे। ओखला, वसंत कुंज और यमुना विहार जैसे बड़े एसटीपी में फीकल कोलीफॉर्म की मात्रा तय सीमा से सैकड़ों गुना अधिक पाई गई।


यमुना में फिर से दिखाई देने वाला सफेद जहरीला झाग इस बात का प्रमाण है कि नदी में बिना साफ किए गए सीवेज का प्रवाह लगातार जारी है। रिपोर्ट में देरी और बढ़ते प्रदूषण के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि यमुना की सफाई फिलहाल केवल कागजों और भाषणों तक सीमित है।