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यूपी सरकार का बजट खर्च: 40% राशि का उपयोग करना चुनौतीपूर्ण

उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने में एक सप्ताह से भी कम समय बचा है, लेकिन सरकार का बजट खर्च केवल 60% तक पहुंचा है। यदि विभागों को शेष 40% राशि का उपयोग करना है, तो उन्हें इसे एक ही कार्यदिवस में खर्च करना होगा, जो कि संभव नहीं दिखता। जानें किन विभागों ने बजट का 50% से कम खर्च किया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के पीछे की वजह।
 

बजट खर्च की स्थिति

लखनऊ। वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने में एक सप्ताह से भी कम समय बचा है। इसके बावजूद, उत्तर प्रदेश के सभी विभाग अब तक सरकार के कुल बजट का केवल 60 प्रतिशत ही खर्च कर पाए हैं। यदि विभागों को अपना पूरा बजट खर्च करना है, तो उन्हें शेष दिनों में बजट का 40 प्रतिशत एक ही कार्यदिवस में खर्च करना होगा, जो कि संभव नहीं लगता।

योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8.08 लाख करोड़ रुपये का मूल बजट प्रस्तुत किया था, जो अनुपूरक के साथ 8.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मार्च के महीने में, सभी विभागों ने मिलकर लगभग 5.19 लाख करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं। कुछ विभागों की स्थिति इतनी खराब है कि वे निर्धारित राशि का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर सके हैं। हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट के उपयोग में हो रही सुस्ती पर नाराजगी व्यक्त की थी।

हालांकि, 31 मार्च तक छह दिन शेष हैं, लेकिन वास्तविक कार्यदिवसों की संख्या इससे कम है। गुरुवार और शुक्रवार को रामनवमी का अवकाश है। जिलों में कार्यालय शनिवार को खुलेंगे, लेकिन शासन और बैंकों में अवकाश रहेगा। 31 मार्च को महावीर जयंती का भी अवकाश है।

कम खर्च करने वाले विभाग

सिंचाई विभाग (निर्माण कार्य), संस्कृति विभाग, संस्थागत वित्त विभाग (स्टांप एवं पंजीकरण), सामान्य प्रशासन विभाग, समाज कल्याण विभाग (जनजाति कल्याण विभाग), लोक निर्माण विभाग (राज्य संपत्ति निदेशालय), राष्ट्रीय एकीकरण विभाग, राजस्व विभाग (आपदा राहत), परिवहन विभाग, न्याय विभाग, नगर विकास विभाग, आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा, कारागार, मत्स्य, ग्राम्य विकास, भूमि विकास एवं जलसंसाधन, भारी एवं मध्यम उद्योग आदि ऐसे विभाग हैं जहां 50 प्रतिशत से भी कम बजट खर्च हुआ है।