रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा की अनोखी शादी: कोडवा परंपरा का जश्न
रश्मिका और विजय की शादी का ऐतिहासिक पल
रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने हाल ही में शादी के बंधन में बंधकर अपने फैंस को खुश कर दिया है। इस जोड़े ने 26 फरवरी को सुबह 10:10 बजे पारंपरिक तेलुगु रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया और एक नई जिंदगी की शुरुआत की। फैंस उनकी शादी की तस्वीरों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि यह जोड़ा अपनी दूसरी शादी की रस्म में व्यस्त है, जो कोडवा परंपरा के अनुसार होगी।
कोडवा शादी की अनोखी विशेषताएँ
इस शादी की एक खास बात यह है कि इसमें कोई सात फेरे नहीं होंगे और न ही कोई पुजारी। कोडवा शादी एक अलग सांस्कृतिक परंपरा का पालन करती है। इस अनोखी 'वारियर वेडिंग' शैली की रस्मों के बारे में जानें।
कोई पुजारी नहीं, परिवार का महत्व
भारतीय शादियों में आमतौर पर पुजारी की भूमिका होती है, लेकिन कोडवा शादी में परिवार के बड़े-बुजुर्ग सभी रस्में निभाते हैं। दूल्हा-दुल्हन अपने पूर्वजों से आशीर्वाद लेते हैं, जिसके गवाह के रूप में एक पवित्र दीपक होता है, जिसमें कावेरी अम्मा की तस्वीर होती है।
दिवसों तक चलने वाला जश्न
कोडवा शादी की रस्में आमतौर पर दो दिनों तक चलती हैं। पहले दिन बाले केट्टुवा की रस्म होती है, जबकि दूसरे दिन मुहूर्त और नीर एडप जैसी महत्वपूर्ण रस्में होती हैं।
दहेज का कोई प्रावधान नहीं
कोडवा शादी की एक और विशेषता यह है कि इसमें दहेज का कोई प्रावधान नहीं है। दोनों परिवार मिलकर शादी का खर्च उठाते हैं, जो समानता और सम्मान का प्रतीक है।
दुल्हन का अनोखा लुक
कोडवा शादी में दुल्हन का लुक बेहद खास होता है। वह एक विशेष साड़ी पहनती है, जो इस क्षेत्र की योद्धा विरासत से जुड़ी होती है।
कावेरी अम्मा और पूर्वजों का महत्व
इस शादी में कावेरी अम्मा और पूर्वजों का विशेष महत्व होता है। दूल्हा-दुल्हन पहले अपने पूर्वजों को सम्मान देते हैं और फिर कावेरी अम्मा से प्रार्थना करते हैं।
शादी का जश्न
शादी की दावत नॉन-वेजिटेरियन होती है, और समारोह पारंपरिक संगीत और बैंड के साथ मनाया जाता है, जिससे यह इवेंट जीवंत और सांस्कृतिक गर्व से भरा होता है।