राजस्थान की राजनीति में विश्वेंद्र सिंह का बड़ा कदम: कांग्रेस से इस्तीफा
गांधी जयंती पर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
गांधी जयंती के अवसर पर राजस्थान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जिसने जयपुर से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी को छोड़ने का निर्णय लिया। हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भरतपुर और डीग में कांग्रेस को मिली हार के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा किए और पार्टी से अलग होने की घोषणा की।
पार्टी के भीतर की समस्याएं
अपने संदेश में, उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पार्टी में चापलूसी और गलत नीतियों का बोलबाला हो गया है, जिससे वफादार कार्यकर्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। विश्वेंद्र सिंह का यह कदम राज्य की राजनीति में एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पूर्वी राजस्थान में उनकी अच्छी पकड़ रही है।
निकाय चुनावों की हार का जिम्मेदार कौन?
निकाय चुनावों में मिली हार के बाद पार्टी के भीतर की कलह खुलकर सामने आ गई। विश्वेंद्र सिंह ने हार के लिए भरतपुर और डीग के कांग्रेस जिलाध्यक्षों के साथ डोटासरा को भी जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप था कि टिकट वितरण में निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया और केवल चहेतों को अवसर दिया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी।
त्यागपत्र में स्वाभिमान की बात
अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि पार्टी में चापलूसी का माहौल इतना बढ़ गया था कि उन्हें सांस लेना मुश्किल हो रहा था। उनका मानना था कि घुट-घुटकर जीने से बेहतर है कि स्वाभिमान के साथ अलग हो जाएं। इसके अलावा, उन्होंने डोटासरा के शिक्षा मंत्री रहते हुए REET भर्ती परीक्षा और संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की।
बीजेपी से कांग्रेस तक का सफर
विश्वेंद्र सिंह ने 2008 में भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। भाजपा के नेता दिगंबर सिंह के साथ विवाद के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। कांग्रेस के टिकट पर वह डीग-कुम्हेर सीट से विधायक बने और अशोक गहलोत सरकार में पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रहे। अब स्वाभिमान का हवाला देते हुए उन्होंने इस पार्टी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है।
डोटासरा खेमे की प्रतिक्रिया
वहीं, डोटासरा और उनके समर्थकों ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है और यह भाजपा का फैलाया हुआ दुष्प्रचार है। कुछ नेताओं ने इसे चुनाव से पहले की अवसरवादी राजनीति भी बताया। भरतपुर, डीग और धौलपुर में प्रभाव रखने वाले विश्वेंद्र सिंह के इस फैसले ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है और अब सभी की नजर उनके अगले कदम पर है।