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राम मंदिर ट्रस्ट की जांच के लिए एसआईटी का कार्यकाल बढ़ा

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) का कार्यकाल 15 दिन बढ़ा दिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
 

उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का कार्यकाल बढ़ाया


उत्तर प्रदेश की सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच कर रहे तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का कार्यकाल 15 दिन के लिए बढ़ा दिया है। यह जानकारी अधिकारियों ने बुधवार को दी।


इससे पहले, प्रदेश सरकार ने 13 जून को आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था, जिसे प्रारंभ में 15 दिन का समय दिया गया था।


एक अधिकारी ने बताया कि 23 जून को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके बाद 25 जून को मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टीनू यादव शामिल हैं।


अधिकारी ने कहा कि मामले की गहनता से जांच करने और दायरा बढ़ाने के लिए एसआईटी का कार्यकाल 15 दिन और बढ़ाया गया है।


इस विशेष जांच दल में लखनऊ के मंडलायुक्त आईएएस विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।