रामचरित मानस की सोने की प्रति गायब, पूर्व गृह सचिव ने उठाए सवाल
रामचरित मानस की रहस्यमय गुमशुदगी
लखनऊ। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव लक्ष्मी नारायण ने दावा किया है कि उन्होंने 8 अप्रैल 2024 को राम मंदिर ट्रस्ट को एक विशेष रामचरित मानस भेंट की थी, जो सोने की परत चढ़ी हुई थी। इस भेंट में लगभग 4 किलोग्राम सोने का उपयोग किया गया था, जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये आंकी गई थी। हालांकि, यह भेंट कुछ महीनों बाद मंदिर से गायब हो गई, और अब तक इसकी रसीद भी प्राप्त नहीं हुई है।
गायब रामचरित मानस की पूजा का इतिहास
लक्ष्मी नारायण ने बताया कि प्रारंभ में यह रामचरित मानस मंदिर में 5 महीने तक रखी गई थी, जहां इसकी नियमित पूजा होती थी और भक्त इसे देख सकते थे। लेकिन अचानक इसे हटा दिया गया। उन्होंने कई बार इसके बारे में जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
आरएसएस प्रमुख से मुलाकात का अनुभव
लक्ष्मी नारायण ने कहा कि उनकी मुलाकात आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से हैदराबाद में हुई थी, जहां उन्होंने अपनी श्रद्धा के बारे में बताया। भागवत ने मदद का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
गायब उपहारों की नई कहानी
लक्ष्मी नारायण ने एक चैनल पर कहा कि उनके परिवार द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय को सौंपी गई सोने की रामचरित मानस भी गायब हो गई है। उन्होंने कई बार रसीद मांगी, लेकिन उन्हें कोई रसीद नहीं दी गई।
चंपतराय से मुलाकात का अनुभव
लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उन्होंने चंपतराय से मिलने के लिए नौ घंटे और फिर चार घंटे का इंतजार किया, लेकिन रसीद अब तक नहीं मिली। उन्होंने कहा कि यह रामचरित मानस उनकी दिवंगत मां की भक्ति का प्रतीक है।
आंदोलन का इतिहास
उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए कन्याकुमारी से भेजी गई पहली ईंट उनके ससुर के घर से आई थी। जब रसीद नहीं मिली, तो उनके एक परिचित ने मोहन भागवत से मिलवाया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।