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रेल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कवच प्रणाली का विस्तार

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' की प्रगति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली 2020 से लागू की जा रही है और अब तक 3,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर इसे लागू किया जा चुका है। 'कवच' एक व्यापक सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और टेलीकॉम टावर शामिल हैं। पूर्वोत्तर रेलवे में भी इस प्रणाली को लागू करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। जानें इस प्रणाली के विस्तार और इसके लाभों के बारे में।
 

कवच प्रणाली की प्रगति पर रेल मंत्री का बयान

नई दिल्ली – भारतीय रेल की सुरक्षा को आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' की प्रगति के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि 'कवच' को 2020 में नेशनल ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम के रूप में मान्यता दी गई थी और इसे तेजी से देशभर में लागू किया जा रहा है। रेल मंत्री के अनुसार, अब तक लगभग 3,000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर 'कवच' प्रणाली लागू की जा चुकी है, जबकि लगभग 20,000 किलोमीटर रेल मार्ग पर इसका कार्य जारी है। इसके साथ ही, लगभग 8,000 लोकोमोटिव में इस तकनीक को स्थापित करने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।


उन्होंने स्पष्ट किया कि 'कवच' केवल एक साधारण उपकरण नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक और जटिल सुरक्षा प्रणाली है। इसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, टेलीकॉम टावर, डेटा सेंटर और ट्रेनों में लगे ऑनबोर्ड उपकरण शामिल हैं। इसकी संरचना एक पूर्ण विकसित टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के समान है, जो ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करती है।


रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से 'कवच' प्रणाली को तेजी से लागू किया जा रहा है। पूर्वोत्तर रेलवे में भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। यहां 1,441 रूट किलोमीटर पर 'कवच' लगाने के लिए रेल मंत्रालय द्वारा 492.21 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी जा चुकी है।


पूर्वोत्तर रेलवे के विभिन्न मंडलों में इस परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण रेलखंडों को शामिल किया गया है। लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर मंडलों के प्रमुख रूट्स पर 'कवच' प्रणाली स्थापित करने का कार्य स्वीकृत हो चुका है, जिससे इस क्षेत्र में रेल सुरक्षा और मजबूत होगी। पहले चरण में 551 रूट किलोमीटर के व्यस्त रेलमार्गों पर 'कवच' लगाया जाएगा। इसके तहत लखनऊ मंडल के सीतापुर सिटी-बुढ़वल, बुढ़वल-गोरखपुर कैंट, मानक नगर-लखनऊ-मल्हौर और बाराबंकी-बुढ़वल खंडों के साथ वाराणसी मंडल के गोरखपुर कैंट-गोल्डिनगंज खंड को शामिल किया गया है।


इन परियोजनाओं के अंतर्गत कुल 108 टेलीकॉम टावर स्थापित किए जाएंगे, जिनका सर्वे कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान में छपरा-बाराबंकी मुख्य मार्ग पर टावर लगाने का कार्य जारी है, जबकि गोरखपुर-बस्ती खंड में 20 टावर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।


रेल मंत्रालय के इस महत्वाकांक्षी कदम से न केवल ट्रेन संचालन में सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में रेल दुर्घटनाओं की संभावना को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। स्वदेशी तकनीक 'कवच' को भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।