लग्जरी घड़ियों का नया ट्रेंड: सोने के लिए पिघलाना
नई दिल्ली में लग्जरी घड़ियों का बदलता परिदृश्य
नई दिल्ली: दुनिया भर में लग्जरी घड़ियों को लंबे समय से स्टेटस सिंबल, निवेश और पारिवारिक धरोहर के रूप में देखा जाता रहा है। कई लोग पीढ़ियों से चली आ रही महंगी घड़ियों को संजोकर रखते हैं, लेकिन हाल के समय में एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है। लोग विंटेज और लग्जरी घड़ियों को बेचने के बजाय उन्हें पिघलाकर उनमें से सोना निकालने का विकल्प चुन रहे हैं। इसका मुख्य कारण सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतें हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, विशेष रूप से ओमेगा, टैग ह्यूअर और अन्य कुछ लग्जरी ब्रांडों की पुरानी घड़ियों को बड़ी संख्या में स्क्रैप किया जा रहा है। इनमें से कई घड़ियां अच्छी स्थिति में होते हुए भी भट्ठियों में पहुंच रही हैं।
कैसे हो रहा फायदा?
ब्रिटेन के गोल्ड ट्रेडर जॉन व्हाइट ने हाल ही में 1970 के दशक की 18 कैरेट ओमेगा कॉन्स्टेलेशन घड़ी को पिघलाने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि नीलामी में इस घड़ी की कीमत लगभग 4,000 से 4,500 पाउंड होती, जबकि उसमें मौजूद सोने का मूल्य इससे कहीं अधिक था। घड़ी को पिघलाने के बाद निकले सोने की कीमत लगभग 5,750 पाउंड आंकी गई। इसका मतलब है कि घड़ी बेचने की तुलना में सोना निकालकर बेचना अधिक लाभकारी साबित हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय उन घड़ियों को सबसे अधिक खतरा है जो कभी लोकप्रिय थीं, लेकिन अब कलेक्टरों के बीच उनकी मांग कम हो गई है। ऐसी घड़ियों की बाजार कीमत अक्सर उनके अंदर मौजूद सोने की कीमत से कम हो जाती है। यही कारण है कि मालिक उन्हें सुरक्षित रखने के बजाय पिघलाने का निर्णय ले रहे हैं।
घड़ियों के इतिहास के जानकारों का क्या है मानना?
घड़ियों के इतिहास के जानकार एड्रियन हेलवुड इस ट्रेंड को चिंताजनक मानते हैं। उनके अनुसार, जब कोई विंटेज घड़ी पिघलाई जाती है, तो केवल धातु नहीं बदलती, बल्कि उससे जुड़ा इतिहास, डिजाइन और सांस्कृतिक महत्व भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। कई घड़ियां परिवारों की धरोहर और यादों का हिस्सा होती हैं।
हालांकि, सभी ब्रांड इस खतरे का सामना नहीं कर रहे हैं। रोलेक्स और पाटेक फिलिप जैसी कंपनियों की घड़ियों की मांग लगातार बनी हुई है। इनकी रीसेल वैल्यू अक्सर उनमें मौजूद सोने की कीमत से कहीं अधिक होती है, इसलिए इन्हें पिघलाना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं माना जाता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले वर्षों में कई दुर्लभ और ऐतिहासिक घड़ियां बाजार से हमेशा के लिए गायब हो सकती हैं। इससे घड़ी उद्योग की विरासत और इतिहास को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।