लाइफ इंश्योरेंस में प्रीमियम न जमा करने का खतरा: जानें क्या करें
महत्वपूर्ण जानकारी
नई दिल्ली: यदि लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम समय पर नहीं भरा गया, तो यह परिवार को लाखों रुपये के डेथ क्लेम से वंचित कर सकता है। महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के हालिया निर्णय ने स्पष्ट किया है कि केवल रिवाइवल कोटेशन जारी होने से पॉलिसी को फिर से सक्रिय नहीं माना जाएगा।
जब तक बीमा कंपनी पॉलिसी को औपचारिक रूप से फिर से लागू नहीं करती, तब तक बीमा कवर प्रभावी नहीं होगा।
एक मामला जो सबक सिखाता है
जानें ऐसा एक मामला?
एक मामले में, पॉलिसीधारक की मृत्यु उस समय हुई जब बीमा कंपनी द्वारा जारी रिवाइवल कोटेशन अभी भी मान्य था। इसके बावजूद, आयोग ने लगभग 70 लाख रुपये के डेथ क्लेम को अस्वीकार करने का निर्णय लिया। हालांकि, विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, पहले वर्ष में जमा किए गए लगभग 7 लाख रुपये का प्रीमियम लौटाने का आदेश दिया गया।
ग्रेस पीरियड का महत्व
ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद क्या होता है?
बीमा पॉलिसी में प्रीमियम की नियत तारीख के बाद कुछ समय का ग्रेस पीरियड दिया जाता है। इस दौरान, यदि भुगतान किया जाता है, तो पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बीमा कवर जारी रह सकता है। लेकिन यदि ग्रेस पीरियड समाप्त होने के बाद प्रीमियम नहीं भरा गया, तो पॉलिसी लैप्स हो सकती है। कुछ पारंपरिक पॉलिसियां पेड अप स्थिति में चली जाती हैं, जबकि टर्म इंश्योरेंस में बीमा कवर पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
रिवाइवल प्रक्रिया की जानकारी
रिवाइवल और एक्टिव पॉलिसी में क्या है अंतर?
लैप्स हुई पॉलिसी को फिर से चालू करने के लिए बकाया प्रीमियम, ब्याज और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होते हैं। कई मामलों में, मेडिकल जांच भी करानी पड़ सकती है। केवल रिवाइवल का संदेश या कोटेशन मिलने का मतलब यह नहीं है कि पॉलिसी फिर से सक्रिय हो गई है। हमेशा बीमा कंपनी से लिखित पुष्टि लेना आवश्यक है।
प्रीमियम न जमा करने पर क्या करें?
प्रीमियम मिस हो जाए तो क्या करें?
सबसे पहले, अपनी पॉलिसी का स्टेटस जांचें। यदि ग्रेस पीरियड चल रहा है, तो तुरंत प्रीमियम जमा करें। यदि पॉलिसी लैप्स हो गई है, तो रिवाइवल की प्रक्रिया पूरी करें और उसके बाद लिखित रूप से पुष्टि प्राप्त करें कि पॉलिसी फिर से इन फोर्स हो गई है।
पॉलिसीधारकों के लिए सलाह
पॉलिसीधारकों के लिए जरूरी सलाह
ऑटो डेबिट सुविधा पर पूरी तरह निर्भर न रहें। अपने बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें और मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी तथा बैंक विवरण हमेशा अपडेट रखें। अपने नॉमिनी को भी पॉलिसी नंबर, बीमा कंपनी का नाम और दस्तावेजों की जानकारी दें। समय पर प्रीमियम जमा करना और पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचना ही बड़े डेथ क्लेम की सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद तरीका है।