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लुधियाना कैफे पर सर्विस चार्ज लगाने का जुर्माना

लुधियाना के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक कैफे पर ग्राहक के बिल में जबरन सर्विस चार्ज जोड़ने के मामले में कार्रवाई की है। आयोग ने कैफे एलिजाबेथ-3 को 52.50 रुपये सर्विस चार्ज ब्याज सहित लौटाने और 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला तब शुरू हुआ जब एक ग्राहक ने कैफे में ऑर्डर के बावजूद सर्विस चार्ज लगाने पर आपत्ति जताई। आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए कार्रवाई की।
 

पंजाब में उपभोक्ता आयोग का फैसला


पंजाब: लुधियाना के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक कैफे द्वारा ग्राहक के बिल में अनधिकृत सर्विस चार्ज जोड़ने को गलत ठहराया है। आयोग ने कैफे एलिजाबेथ-3 को 52.50 रुपये सर्विस चार्ज ब्याज सहित लौटाने और 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह निर्णय आयोग के अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने हैबोवाल कलां निवासी रिषभ गुप्ता की शिकायत पर सुनाया।


कैफे को सर्विस चार्ज का भुगतान करना होगा

आयोग ने निर्देश दिया है कि कैफे को आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर यह राशि चुकानी होगी। इसके साथ ही, सर्विस चार्ज पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग ने इस व्यवहार को अनुचित व्यापार प्रथा के रूप में देखा है।


शिकायत के अनुसार कैफे ने गलत तरीके से चार्ज किया

रिषभ गुप्ता ने 24 जनवरी 2026 को अपने दोस्तों के साथ कैफे एलिजाबेथ-3 में पिज्जा और डाइट कोक का कैन ऑर्डर किया। डाइट कोक का कैन बंद अवस्था में दिया गया था, फिर भी कैफे ने बिल में 5 प्रतिशत यानी 52.50 रुपये का सर्विस चार्ज जोड़ दिया। इसके अलावा, जीएसटी भी लगाया गया, जिससे कुल बिल 1,155 रुपये हो गया।


गुप्ता ने कैफे के कर्मचारी से इस पर आपत्ति जताई, लेकिन उन्हें बताया गया कि सर्विस चार्ज लेना कैफे की सामान्य प्रक्रिया है। ग्राहक ने बिल का भुगतान किया, लेकिन बाद में उन्होंने कैफे को कानूनी नोटिस भेजकर सर्विस चार्ज वापस करने की मांग की। नोटिस का कोई उत्तर न मिलने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।


आयोग ने सुनवाई के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि बंद डिब्बे वाले पेय पर सर्विस चार्ज लगाना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में ग्राहक को कोई अतिरिक्त सेवा का लाभ नहीं मिलता, इसलिए कैफे का यह कदम अनुचित माना गया।