लुधियाना: रोजगार के मामले में देश के बड़े शहरों से आगे
लुधियाना की रोजगार स्थिति
अमृतसर: पंजाब का औद्योगिक केंद्र लुधियाना रोजगार के क्षेत्र में कई प्रमुख शहरों से आगे निकल चुका है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी हालिया रिपोर्ट में, लुधियाना ने 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में रोजगार के विभिन्न मानकों पर उत्कृष्टता दिखाई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, शहर का श्रमिक जनसंख्या अनुपात 57 प्रतिशत है, जो कि दिल्ली और फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों से अधिक है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि लुधियाना में औद्योगिक गतिविधियों के निरंतर विकास के कारण नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। विनिर्माण, ऑटोमोबाइल और कपड़ा उद्योग इस शहर में तेजी से बढ़ रहे हैं। इन क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की मांग में वृद्धि के चलते औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में नए रोजगार आधारित पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं।
नियमित वेतनभोगियों की संख्या
नियमित वेतनभोगियों की संख्या सबसे बड़ी ताकत
लुधियाना में लगभग 63 प्रतिशत लोग नियमित वेतनभोगी हैं, जो शहर की मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था को दर्शाता है। वहीं, स्वरोजगार करने वालों की संख्या 34.7 प्रतिशत है। आकस्मिक श्रमिकों का प्रतिशत केवल 2.3 प्रतिशत है, जो यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में लोगों को स्थायी रोजगार प्राप्त हो रहा है।
बेरोजगारी दर
बेरोजगारी दर भी बड़े शहरों से कम
रिपोर्ट के अनुसार, लुधियाना की बेरोजगारी दर केवल 3.5 प्रतिशत है, जो फरीदाबाद की 4.9 प्रतिशत और दिल्ली की 5.3 प्रतिशत से कम है। ये आंकड़े यह दर्शाते हैं कि लुधियाना रोजगार उपलब्ध कराने में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
हालांकि, रोजगार के कई क्षेत्रों में सुधार के बावजूद, महिलाओं की श्रम भागीदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लुधियाना में महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात केवल 22.8 प्रतिशत है। महिलाओं की बेरोजगारी दर 3.8 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों में यह 3.4 प्रतिशत है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है।
अमृतसर की स्थिति
अमृतसर की स्थिति लुधियाना से कमजोर
रिपोर्ट में अमृतसर की रोजगार स्थिति लुधियाना की तुलना में कमजोर बताई गई है। अमृतसर का श्रमिक जनसंख्या अनुपात 45.8 प्रतिशत है, जिसमें पुरुषों का अनुपात 69 प्रतिशत और महिलाओं का केवल 21.2 प्रतिशत है। सीमावर्ती जिला होने के कारण यहां रोजगार बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं।