लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ अदालत में फिर से सुनवाई, 25 अगस्त को महत्वपूर्ण फैसला
अदालत में फिर से कार्रवाई
नई दिल्ली: करीब 13 साल पहले के डीएवी कॉलेज हिंसा और गोलीकांड मामले में एक बार फिर अदालत की कार्रवाई सुर्खियों में है। जिला अदालत ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की पेशी सुनिश्चित करने के लिए साबरमती जेल प्रशासन को प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। पिछली सुनवाई में बिश्नोई की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी नहीं हो पाई थी, जिसके चलते अदालत ने नए निर्देश जारी किए हैं। अब 25 अगस्त को होने वाली सुनवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बाधा
शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद लॉरेंस बिश्नोई की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी नहीं हो सकी। इस पर अदालत ने गुजरात की साबरमती जेल के अधीक्षक को प्रोडक्शन वारंट जारी करते हुए अगली सुनवाई पर आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने का आदेश दिया।
2012 की हिंसक घटना
2012 की घटना से जुड़ा मामला
यह मामला 12 जून 2012 का है, जब सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज में स्टार नाइट कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान दो छात्र संगठनों के समर्थकों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि इसी दौरान गोलीबारी हुई, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई छात्र घायल हुए।
घायल छात्र की कहानी
गोली लगने से छात्र हुआ था घायल
मामले के अनुसार, गोलीबारी में छात्र चरणदेव सिंह घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सेक्टर-3 थाने में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान कई लोगों के बयान दर्ज किए गए और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत पड़ताल की गई।
चार आरोपी बरी
चार आरोपी पहले ही हो चुके बरी
जांच और अदालत में चली सुनवाई के दौरान वर्ष 2014 में साक्ष्यों के अभाव में चार आरोपियों को बरी कर दिया गया था। हालांकि, लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ मामला अलग से जारी रहा। इसी कारण उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया अब भी चल रही है और अदालत समय-समय पर सुनवाई कर रही है।
25 अगस्त की सुनवाई पर ध्यान
25 अगस्त की सुनवाई पर टिकी नजर
अब अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर लॉरेंस बिश्नोई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाए। ऐसे में 25 अगस्त को होने वाली सुनवाई इस लंबे समय से लंबित मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत की अगली कार्रवाई पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।