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लोकसभा में हंगामे के बीच 8 सांसदों का निलंबन और एलपीजी संकट पर चर्चा

लोकसभा में शुक्रवार को एलपीजी संकट और आठ सांसदों के निलंबन को लेकर तीव्र हंगामा हुआ। स्पीकर ओम बिरला ने बार-बार अनुरोध करने के बावजूद विपक्ष के सदस्यों को शांत नहीं कर पाए, जिसके कारण कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और स्पीकर के बयान।
 

लोकसभा में हंगामा और निलंबन

शुक्रवार को लोकसभा में एलपीजी संकट और आठ सांसदों के निलंबन को लेकर तीव्र हंगामा हुआ। स्पीकर ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्षी सदस्यों ने अपनी आवाज उठाई, जिसके कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करने का निर्णय लिया।


सुबह 11 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तो कांग्रेस के सांसद वेल के पास पहुंच गए और एलपीजी संकट पर चर्चा की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने निलंबित सांसदों की वापसी की भी मांग की।


स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा, "मैंने पहले भी कहा था और फिर से कह रहा हूं कि प्रश्नकाल सदन का सबसे महत्वपूर्ण समय है। आज भी प्रतिपक्ष के 8 सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हैं। प्रश्नकाल के दौरान देश के मुद्दे और क्षेत्र की समस्याएं उठती हैं, जिससे सरकार की जवाबदेही तय होती है। इसलिए, सभी को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।"


उन्होंने आगे कहा, "आप कहते हैं कि आपको अपनी बात रखने का मौका चाहिए, लेकिन जब अवसर दिया जाता है, तो आप बोलते नहीं हैं और सदन में गतिरोध पैदा करते हैं। यह संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।" स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों को प्रश्नकाल के बाद अपने मुद्दे उठाने के लिए कहा, लेकिन हंगामा जारी रहा।


स्पीकर ने 8 सदस्यों के निलंबन पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर सदन में मेजों पर चढ़ेंगे, तो इसी तरह की कार्रवाई होगी। सदन की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। विपक्ष के सदस्यों का आचरण सदन की पवित्रता को समाप्त कर रहा है।"


उन्होंने दोहराया कि विपक्ष के सदस्य प्रश्नकाल को बाधित करना चाहते हैं और लगातार गतिरोध पैदा कर रहे हैं। इसके बाद, उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया।