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व्यापमं घोटाले में गवाहों की अनोखी कहानी

मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले में एक व्यक्ति, दीपक कुशवाहा, 847 मामलों में गवाह के रूप में सामने आया है। यह कहानी हरिशंकर परसाई के व्यंग्य से जुड़ी है, जिसमें गवाहों की परिभाषा और पुलिस की जांच के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है। जानिए इस अनोखी स्थिति के पीछे की सच्चाई और दीपक कुशवाहा के बयान बदलने की घटनाएं।
 

व्यंग्य और वास्तविकता का मिलन


प्रसिद्ध लेखक हरिशंकर परसाई, जो मध्य प्रदेश से थे, ने अपनी एक व्यंग्य रचना 'इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर' में एक दिलचस्प कहानी प्रस्तुत की है। इस रचना में इंस्पेक्टर मातादीन ने चांद पर पुलिस की जांच के तरीकों को दर्शाया है। उन्होंने चश्मदीद गवाह की परिभाषा देते हुए कहा कि गवाह वह नहीं होता जो घटना स्थल पर मौजूद हो, बल्कि वह होता है जो अदालत में यह दावा करे कि वह वहां था। इसके अलावा, उन्होंने पुलिस को यह भी सिखाया कि उनके पास हमेशा गवाहों का एक स्टॉक होना चाहिए, जो अदालत में उनकी बातों का समर्थन करें।


यह व्यंग्य तब याद आया जब मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले की जांच की खबर आई। इस घोटाले में एक व्यक्ति, दीपक कुशवाहा, 847 मामलों में गवाह के रूप में सामने आया है। सोचिए, एक व्यक्ति 847 मामलों में गवाह है! यह कोई पहला मामला नहीं है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस ने भी एक गवाह को लगभग 150 मामलों में पेश किया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी।


दीपक कुशवाहा ने 2011 की शिक्षक भर्ती से लेकर सिपाही और खाद्य आपूर्ति में भर्ती तक कई मामलों में गवाही दी है। हालांकि, यह भी बताया गया है कि उन्होंने कई बार अपने बयान बदले हैं।