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शंकराचार्य ने राम मंदिर और आरएसएस पर उठाए गंभीर सवाल

ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने राम मंदिर और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के सदस्य भगवान राम में विश्वास नहीं रखते और मंदिर अब भाजपा और आरएसएस के कार्यालय के समान हो गया है। इसके अलावा, उन्होंने राम लल्ला की मूर्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं, जो अब भंडारगृह में रखी गई है। जानें उनके विवादास्पद बयान के बारे में और क्या कहा उन्होंने राम मंदिर के निर्माण को लेकर।
 

नई दिल्ली में शंकराचार्य का विवादास्पद बयान


ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने अपनी 'गविष्टि' यात्रा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और राम मंदिर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के सदस्य भगवान राम में विश्वास नहीं रखते हैं और मंदिर अब भाजपा और आरएसएस के कार्यालय के समान हो गया है।


स्वामी ने यह भी कहा कि आरएसएस के लोग भगवान राम को भगवान मानने से इंकार कर रहे हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया गया है।


भगवान राम के प्रति आरएसएस का दृष्टिकोण

जो लोग भगवान राम की तस्वीर नहीं लगा सकते, वे अब राम के बारे में निर्णय ले रहे हैं


उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भगवान राम की तस्वीर नहीं लगा सकते, वे अब राम के बारे में निर्णय लेने वाले बन गए हैं। गोविंद गिरी पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि यदि वे अपने गुरु के सच्चे शिष्य हैं, तो राम मंदिर मामले में उनकी अनुपस्थिति का क्या कारण है?


अभिषेक समारोह में संतों की अनुपस्थिति

5,000 संतों को आमंत्रित किया गया, लेकिन गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिला


शंकराचार्य ने यह भी बताया कि राम मंदिर के गर्भगृह में केवल वीवीआईपी को ही प्रवेश दिया गया, जबकि 5,000 संतों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।


राम लल्ला की मूर्ति का विवाद

राम लल्ला की प्रतिमा अब भंडारगृह में रखी है


उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्थापित मूर्ति वह नहीं है जो कानूनी लड़ाई का हिस्सा थी। राम लल्ला की वह प्रतिमा, जिसने कई कठिनाइयों का सामना किया, अब भंडारगृह में रखी गई है।


राम मंदिर की स्थिति पर शंकराचार्य की राय

राम मंदिर का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे राम मंदिर जाना चाहते हैं, लेकिन केवल तब जब मंदिर पूरी तरह से स्थापित हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान ढांचा भाजपा और आरएसएस के कार्यालय जैसा है।