शिमला में पुलिस कांस्टेबल की पेंटिंग प्रदर्शनी ने बटोरे दर्शकों का ध्यान
गेयटी थियेटर में कला का अद्भुत प्रदर्शन
शिमला/ऊषा शर्मा - शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में आयोजित हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवानों की पेंटिंग प्रदर्शनी में 27 वर्षीय कांस्टेबल आसिफ खान की कला ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। उनकी बनाई हिंदू देवी-देवताओं की जीवंत पेंटिंग्स, भगवान बुद्ध के चित्र और पुलिस-सेना के जवानों के भावपूर्ण रेखाचित्र दर्शकों को खासतौर पर प्रभावित कर रहे हैं। प्रदर्शनी में आने वाले लोग आसिफ की पेंटिंग्स के सामने रुककर उन्हें ध्यान से देख रहे हैं, जहां उन्होंने धार्मिक आस्था, संवेदनशीलता और अनुशासन के प्रतीकों को कैनवास पर उतारा है। कार्यकारी डीजीपी अशोक तिवारी की हूबहू पेंटिंग भी प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण बनी हुई है, जिसे देखने वाले उनकी बारीकी और मेहनत की सराहना कर रहे हैं। आसिफ खान, जो बिलासपुर जिले के झंडूता क्षेत्र से हैं, ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पेंटिंग का शौक रहा है।
आसिफ ने छठी कक्षा से चित्र बनाना शुरू किया और यह रुचि स्कूल से लेकर कॉलेज तक बनी रही। लगभग छह साल पहले जब वे पुलिस विभाग में कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुए, तो ड्यूटी की व्यस्तता के बावजूद उन्होंने अपने शौक को जारी रखा। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित अपनी पेंटिंग्स को तैयार करने में उन्हें लगभग दो महीने का समय लगा, जिसमें उन्होंने ड्यूटी के बीच मिलने वाले खाली समय का उपयोग किया। यह उनके लिए गर्व का क्षण है क्योंकि उनकी पेंटिंग्स पहली बार किसी सार्वजनिक प्रदर्शनी में प्रदर्शित हो रही हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया, जिसने उन्हें अपनी कला दिखाने का अवसर दिया।
इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी में पुलिस अधिकारियों से लेकर कांस्टेबल स्तर तक के जवानों की पेंटिंग्स शामिल की गई हैं, लेकिन आसिफ खान की कृतियों ने विशेष पहचान बनाई है। धार्मिक विषयों पर उनकी संवेदनशील प्रस्तुति, भगवान बुद्ध की शांत मुद्रा और पुलिस-सेना के जवानों के चित्रों ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ा है। प्रदर्शनी का उद्घाटन शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान ने किया, जिन्होंने पुलिस जवानों की कला की सराहना की और कहा कि यह रचनात्मकता समाज के लिए प्रेरणादायक है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि भविष्य में ‘शिमला हाट’ में पुलिस कलाकारों को विशेष स्थान देने का प्रयास किया जाएगा ताकि उनकी कला को स्थायी मंच मिल सके। कार्यकारी डीजीपी अशोक तिवारी ने कहा कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि जवानों के भीतर रचनात्मक सोच और भावनाएं भी होती हैं। विभाग ऐसे पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहित कर रहा है, जो पेंटिंग और हैंडीक्राफ्ट जैसी कलाओं में रुचि रखते हैं। यदि पुलिस कलाकार अपनी कृतियों को व्यावसायिक रूप से आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो विभाग इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने पर विचार करेगा।