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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावे में गबन की जांच में नए साक्ष्य सामने आए

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से संबंधित गबन की जांच में विशेष जांच दल ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पीएमओ को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में चढ़ावे की चोरी के कई साक्ष्य और गवाहों के बयान शामिल हैं। जांच में ट्रस्ट के करीब तीस लोगों की संलिप्तता सामने आई है, जिससे मामला और भी जटिल हो गया है। जानें इस मामले में आगे की कार्रवाई क्या होगी और किसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
 

विशेष जांच दल की रिपोर्ट पीएमओ को सौंपी गई


विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट पीएमओ को सौंपी


श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, लखनऊ : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से संबंधित गबन और अनियमितताओं का मामला जटिल होता जा रहा है। प्रारंभ में यह मामला इतना गंभीर नहीं लग रहा था, लेकिन जांच के दौरान इसके दायरे में विस्तार होता गया। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट और पीएमओ तक पहुंच चुका है। पीएमओ ने हाल ही में इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था।


एसआईटी की प्रारंभिक जांच पूरी

विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है और रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट में चढ़ावे की चोरी से संबंधित कई साक्ष्य और गवाहों के बयान शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, कई अधिकारियों की संलिप्तता की संभावना भी जताई गई है।


इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भूमिका को भी विस्तार से दर्ज किया गया है। इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के कई प्रमुख अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिससे जांच की आंच लखनऊ से दिल्ली तक पहुंच गई है।


ट्रस्ट के 30 लोग भी गबन में शामिल

एसआईटी की जांच में ट्रस्ट के लगभग तीस लोगों की संलिप्तता सामने आई है। प्रारंभिक पूछताछ में कई सवालों के संतोषजनक उत्तर न मिलने के कारण टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प जैसे व्यक्तियों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इन व्यक्तियों के पास से नकदी बरामद होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। एसआईटी ने इनसे 20 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की है।


सूत्रों का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प सहित पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय एसआईटी की रिपोर्ट और शासन स्तर पर समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देशों का भी इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था।