संजय झा ने इंडिया ब्लॉक के टूटने की वजहों का किया खुलासा
इंडिया ब्लॉक में टूट की कहानी
पटना: जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' के टूटने के पीछे की कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभिन्न विरोधी दलों को एक मंच पर लाने के लिए काफी प्रयास किए थे, लेकिन कुछ क्षेत्रीय नेताओं के व्यक्तिगत हितों और गठबंधन के भविष्य के दृष्टिकोण की कमी के कारण यह प्रयास विफल हो गया।
ममता और केजरीवाल पर आरोप
एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए गए विशेष साक्षात्कार में, संजय झा ने ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल पर सीधा आरोप लगाया। उनके अनुसार, इन दोनों नेताओं ने जानबूझकर ऐसे हालात बनाए, जिससे सहयोगी दलों के बीच अविश्वास की स्थिति और बढ़ गई।
कांग्रेस को बैकफुट पर लाने की रणनीति
संजय झा ने बताया कि गठबंधन के भीतर सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन अचानक एक महत्वपूर्ण बैठक में ममता और केजरीवाल ने कहा कि गठबंधन का संयोजक किसी दलित नेता को होना चाहिए। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे बढ़ाया, जिससे कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा।
बिना ठोस योजना के चुनाव में उतरने की कोशिश
जेडीयू नेता ने गठबंधन की रणनीतिक विफलताओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस ब्लॉक में कोई ठोस योजना नहीं थी कि वे किस दृष्टिकोण के साथ चुनाव में जाएंगे। क्षेत्रीय दलों को यह समझ में आ गया कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी का विरोध करने से चुनाव नहीं जीते जा सकते। जनता के सामने एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना आवश्यक था।
एनडीए के साथ गठबंधन की मजबूरी
जब संजय झा से पूछा गया कि जेडीयू ने अचानक एनडीए के साथ गठबंधन क्यों किया, तो उन्होंने बिहार की राजनीतिक स्थिति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में टिके रहने के लिए किसी बड़े राष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बनना आवश्यक है। जब नीतीश कुमार को लगा कि इंडिया अलायंस का कोई भविष्य नहीं है, तो राज्य के विकास के लिए बीजेपी के साथ जाना ही एकमात्र विकल्प रह गया।