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सर्बिया में छात्रों ने बदली राजनीतिक तस्वीर, वुसिक ने स्वीकार की हार

सर्बिया में हालिया चुनावों में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन ने राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। अलेक्जेंडर वुसिक, जो 14 वर्षों से सत्ता में थे, ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, छात्रों के समर्थक समूह को संसद में बहुमत मिलने की संभावना है। यह चुनावी परिणाम भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों का परिणाम है। जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

सर्बियाई राजनीति में छात्रों का उभार


सर्बियाई राजनीति: छात्रों ने चुनावी मैदान में सर्बिया की राजनीति को हिला दिया है। अलेक्जेंडर वुसिक की पार्टी, जो पिछले 14 वर्षों से सत्ता में थी, अब पीछे होती नजर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, लंबे समय से सर्बिया के नेता रहे वुसिक ने छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध आंदोलन के सामने अपनी हार स्वीकार कर ली है। यदि ये रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं, तो छात्रों के हाथों में सत्ता की चाबी आना लगभग निश्चित है।


रविवार की रात हार स्वीकार करते हुए, दक्षिणपंथी नेता ने कहा, "अभी अंतिम परिणाम नहीं आए हैं... लेकिन यह स्पष्ट है कि हम ये चुनाव हार गए हैं।"


सर्बिया के चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ है, जो विशेषज्ञों के अनुसार छात्र आंदोलन के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। वुसिक की हार मानने के बाद जश्न का माहौल बन गया।


वुसिक ने ये चुनाव तब कराए जब नोवी साद शहर में एक रेलवे स्टेशन की छत गिरने के बाद दो साल तक विरोध प्रदर्शन हुए। इस हादसे में 16 लोगों की जान गई थी, जिसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का प्रतीक माना गया।


रविवार को आए प्रारंभिक चुनावी अनुमानों के अनुसार, 250 सदस्यों वाली संसद में छात्र आंदोलन के समर्थक समूह को लगभग 138 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, वुसिक की सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) को लगभग 104 सीटें मिलने का अनुमान है। अन्य सीटें जातीय अल्पसंख्यकों की पार्टियों के पास जा सकती हैं।


चुनाव सर्वेक्षण एजेंसी CESID और IPSOS के प्रारंभिक आंकड़ों ने भी छात्रों के समर्थन वाले समूह की बढ़त के संकेत दिए हैं। हालांकि, ये अभी प्रारंभिक अनुमान हैं और अंतिम परिणामों से स्थिति बदल भी सकती है।