साइबर ठगी से बचने के उपाय: पुलिस की चेतावनी
साइबर अपराधियों के नए तरीके
रेवाड़ी के पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा ने नागरिकों को सतर्क करते हुए बताया कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को ठगने का प्रयास कर रहे हैं। पहले ठग खुद को बैंक के अधिकारी या लॉटरी एजेंट बताकर लोगों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब वे व्हाट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ओएलएक्स, फर्जी निवेश ऐप, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, पार्ट-टाइम जॉब, क्यूआर कोड स्कैम, लोन ऐप और रिमोट एक्सेस ऐप जैसे माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी, जैसे कि पुलिस, सीबीआई, ईडी, आरबीआई, आयकर विभाग या बैंक, कभी भी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती और न ही फोन पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है। ऐसे सभी कॉल और संदेश पूरी तरह से फर्जी होते हैं, जिनका उद्देश्य लोगों को डराना या लालच देकर ठगी करना होता है।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी शेयर मार्केट और क्रिप्टो में अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश करवाते हैं, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर टास्क पूरा करवाकर पैसे ऐंठते हैं, और सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर आर्थिक मदद मांगते हैं। इसके अलावा, वे क्यूआर कोड भेजकर लोगों के खातों से पैसे निकाल लेते हैं।
एसपी मीणा ने आम जनता से अपील की कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, सीवीवी, एटीएम पिन या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयर या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें। सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश या नौकरी के ऑफर की पूरी जांच करें और केवल आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
अगर किसी के साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी। साइबर अपराधी लोगों की तकनीकी जानकारी नहीं, बल्कि उनकी जल्दबाजी, लालच और घबराहट का फायदा उठाते हैं।
इसलिए, किसी भी अनजान कॉल, लिंक या निवेश प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करें। नागरिकों से अपील की गई है कि वे सोच-समझकर क्लिक करें, जांच-परखकर ही भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि वे अपने परिवार को भी साइबर ठगी से सुरक्षित रख सकें।