सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया
सारनाथ का ऐतिहासिक महत्व
यह दर्जा पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा
सारनाथ, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट स्थित एक प्राचीन बौद्ध स्थल है, अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हो गया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में लिया गया। यूनेस्को ने इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए इसे भारत की नई विश्व धरोहर के रूप में मान्यता दी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस चयन पर खुशी व्यक्त की है.
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन और उनके संदेशों से जुड़े इस पवित्र स्थल ने पूरी दुनिया को शांति, करुणा और मानवता का संदेश दिया है।
पर्यटन और रोजगार में वृद्धि
केंद्र सरकार ने 2025-26 के नामांकन चक्र के तहत सारनाथ का प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा था। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में इस बारे में जानकारी दी थी। अब जब यूनेस्को ने इसे मान्यता दी है, सारनाथ न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की सांस्कृतिक धरोहर बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन, स्थानीय रोजगार और बौद्ध विरासत के संरक्षण को नई गति मिलेगी।
बौद्ध अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल
भारत के राजदूत विशाल वी. शर्मा ने विश्व धरोहर केंद्र को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और एएसआई का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सारनाथ दुनिया भर के 50 करोड़ से अधिक बौद्ध अनुयायियों के लिए चिंतन का केंद्र है। यह युवाओं को सत्य की खोज, अहिंसा को अपनाने और समावेशी सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करता है।