सीबीएसई की लापरवाही: छात्रों को मिली गलत आंसरशीट, IIT करेगा जांच
सीबीएसई के ऑनलाइन मार्किंग सिस्टम में गंभीर खामी
नई दिल्ली: सीबीएसई की 12वीं कक्षा के ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसने छात्रों और उनके अभिभावकों को चिंतित कर दिया है। पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को जो स्कैन कॉपियां भेजी जा रही हैं, उनमें उनकी लिखावट नहीं है। आंसरशीट के बाहर नाम और रोल नंबर सही हैं, लेकिन अंदर के पन्नों पर किसी अन्य छात्र के उत्तर दर्ज हैं। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया है और बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
संजना की कहानी: केमिस्ट्री में मिले केवल 11 अंक
वेदांत के बाद अब संजना नाम की एक छात्रा ने सीबीएसई की प्रणाली की पोल खोली है। संजना को 12वीं की बोर्ड परीक्षा में केमिस्ट्री के पेपर में 70 में से केवल 11 अंक मिले थे, जिससे वह हैरान थीं। जब उन्होंने री-इवेल्यूशन के लिए आवेदन किया और स्कैन कॉपी प्राप्त की, तो उन्हें पता चला कि आंसरशीट के अंदर की लिखावट उनकी नहीं थी। उन्होंने अपनी अंग्रेजी की कॉपी का सबूत भी साझा किया है, जिसमें उनकी असली हैंडराइटिंग स्पष्ट है। छात्रा ने बोर्ड को ईमेल किया है, लेकिन हेल्पलाइन से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
वेदांत का मामला: सीबीएसई ने स्वीकार की गलती
इससे पहले, शाहदरा के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने भी फिजिक्स की कॉपी को लेकर इसी तरह का दावा किया था। उनकी आंसरशीट के पहले पन्ने पर जानकारी सही थी, लेकिन अंदर की लिखावट किसी और की थी। वेदांत के भाई सिद्धांत ने बताया कि जब उन्होंने यह मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाया, तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। हालांकि, सीबीएसई ने मामले की जांच की और छात्र की शिकायत को सही पाया। बोर्ड ने अपनी गलती मानते हुए वेदांत को उनकी असली उत्तर पुस्तिका भेज दी।
मार्किंग में अजीबोगरीब तरीके से छात्रों में बढ़ी चिंता
गलत कॉपियों के अलावा, मार्किंग के अजीब तरीके से भी छात्र परेशान हैं। एक अन्य छात्रा ने बताया कि अंग्रेजी और गणित के बहुविकल्पीय सवालों में उसे आधा अंक दिया गया है, जबकि नियम के अनुसार ऐसे सवालों में या तो पूरा अंक मिलता है या शून्य। इस विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जैसे कि विद्यार्थियों की आंसरशीट आपस में कैसे बदल गईं? बोर्ड ने इतनी धुंधली स्कैन कॉपियों की जांच कैसे की?
तकनीकी खामियों की जांच के लिए IIT की टीम नियुक्त
सीबीएसई की इस गंभीर गलती और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर अब सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की है कि परीक्षा के बाद की री-इवेल्यूशन सेवाओं में आ रही तकनीकी गड़बड़ियों की गहन जांच की जाएगी। इस कार्य के लिए आईआईटी-मद्रास और आईआईटी-कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को नियुक्त किया गया है। यह टीम सीबीएसई की सहायता करेगी ताकि इस तरह की त्रुटियों को दूर किया जा सके और एक पारदर्शी प्रणाली सुनिश्चित की जा सके।