सुखबीर बादल को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया, बहबल कलां गोलीकांड की जांच जारी
चंडीगढ़: सुखबीर बादल की मुश्किलें बढ़ीं
चंडीगढ़: बहबल कलां गोलीकांड से संबंधित मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल की स्थिति एक बार फिर कठिन होती दिखाई दे रही है। पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। टीम ने 11 सितंबर को चंडीगढ़ में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इससे पहले, 20 जुलाई 2026 को भी सुखबीर बादल से लगभग दो घंटे तक सवाल-जवाब किए गए थे। उन्होंने पहले ही कहा था कि वह जांच टीम के बुलावे पर पेश होंगे।
अकाली दल का सरकार पर आरोप
सुखबीर बादल को दोबारा बुलाने पर अकाली दल ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप लगाया है। पार्टी प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उनका कहना है कि सरकार कई मुद्दों में फंसी हुई है और इस तरह की कार्रवाई लोगों का ध्यान असली सवालों से भटकाने के लिए की जा रही है। कलेर ने कहा कि ऐसी कोशिशों से सरकार जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से नहीं हटा सकती।
2015 की घटना से जुड़ा मामला
बहबल कलां गोलीकांड की जड़ें 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी हैं। बरगाड़ी बेअदबी मामले के बाद पंजाब के विभिन्न हिस्सों में लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान बहबल कलां में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस फायरिंग में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।
सुखबीर बादल की भूमिका पर सवाल
घटना के समय पंजाब में शिरोमणि अकाली दल-बीजेपी गठबंधन की सरकार थी। प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री थे, जबकि सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे थे। पंजाब पुलिस गृह विभाग के अधीन थी, जिससे उनकी भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 2015 से 2026 तक सरकारें और जांच एजेंसियां बदलती रहीं, लेकिन पीड़ित परिवारों को अभी भी अंतिम न्याय का इंतजार है।
मामला राजनीतिक मुद्दा क्यों बना
बहबल कलां गोलीकांड पंजाब की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। बेअदबी और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग के कारण विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में जांच और पूछताछ के कई दौर चल चुके हैं। अकाली दल का कहना है कि मौजूदा सरकार राजनीतिक प्रतिशोध के तहत कार्रवाई कर रही है, जबकि जांच एजेंसी की पूछताछ तथ्यों को सामने लाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। सुखबीर बादल को अब 11 सितंबर को एसआईटी के सामने पेश होना है।