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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: स्कूलों में यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की एंट्री पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की बिना अनुमति एंट्री और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने वाले राज्य सरकारों के आदेशों को मान्यता दी है। अदालत ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिससे दोनों राज्यों के सख्त दिशा-निर्देशों को बरकरार रखा गया। जानें इस फैसले के पीछे की वजह और इसके प्रभाव के बारे में।
 

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी स्कूलों में यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और अन्य बाहरी व्यक्तियों की बिना अनुमति एंट्री और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने वाले राज्य सरकारों के आदेशों को मान्यता दे दी है। अदालत ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार द्वारा स्कूलों में बिना अनुमति प्रवेश, फोटोग्राफी, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इस निर्णय से दोनों राज्यों के सख्त दिशा-निर्देशों को बनाए रखा गया है।


अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई से इनकार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि राज्यों द्वारा लगाए गए ये प्रतिबंध नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि स्वतंत्र दस्तावेजीकरण से स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी उजागर होती है, लेकिन अदालत ने इस पर दखल देने से मना कर दिया।


‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का प्रभाव

यह विवाद तब बढ़ा जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया। इस मुहिम के तहत कई राज्यों के स्कूलों में यूट्यूबर्स और इन्फ्लुएंसर्स ने बिना अनुमति घुसकर वीडियो बनाने की कोशिश की। खासकर लखनऊ के एक स्कूल में बिना इजाजत घुसने वाले यूट्यूबर्स द्वारा शिक्षिकाओं पर अनुचित दबाव डालने की घटना ने अभिभावकों और शिक्षकों में आक्रोश पैदा कर दिया।


राज्य सरकारों के कड़े निर्देश

राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने स्कूलों के शैक्षणिक माहौल और बच्चों की गोपनीयता को सुरक्षित रखने के लिए कड़े सर्कुलर जारी किए थे। राजस्थान ने 16 अगस्त 2026 और उत्तर प्रदेश ने 19 अगस्त 2026 को आदेश जारी किए थे, जिसमें बिना सक्षम शिक्षा अधिकारी की अनुमति के स्कूल परिसर में प्रवेश, तस्वीरें खींचने, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करने या लाइव स्ट्रीमिंग करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब बिना अनुमति के स्कूलों में घुसने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।